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पुरुषों में भी होती है मूड स्विंग की समस्या जाने क्यों

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Written by Saransh Sethi

आपने कई बार ‘पल में तोला,पल में माशा’ वाली कहावत जरूर सुनी होगी। आमतौर पर महिलाओं के लिए कही जाने वाली इस कहावत का इशारा उनके बार-बार बदलने वाले मूड की ओर किया जाता है,क्योंकि महिलाओं में मूड स्विंग्स की समस्या होना एक आम बात है। लेकिन बदलते वक्त के साथ ही पुरुषों में भी यह समस्‍या आम हो चुकी है 

पुरुष और महिला दोनों के लिए मिजाज सामान्य है। विभिन्न अध्ययनों में कहा गया है कि महिला में होने वाले मिजाज का पता पुरुष की तुलना में आसानी से लगाया जा सकता है क्योंकि महिला इसे कभी भी व्यक्त कर देती है क्योंकि पुरुष वहां पर झूलों को नियंत्रित रखता है। यह एक पूर्ण झूठ है जो कहता है कि पुरुषों को कुछ भी नहीं लगता है। वे खुशी, दर्द, क्रोध और हर एक भावना को महसूस करते हैं।

पुरुषों में मूड स्‍विंग के कारण | Reasons for Mood Swing in Men in Hindi

 हार्मोन असंतुलन

हार्मोन असंतुलन की समस्या ना केवल महिलाओं में बल्कि पुरुषों में भी देखने को मिलती है। पुरुषों में हर तीन चार महीने में हार्मोन इंबैलेंस सकी समस्या आती है, जिससे उनका मूड बदलने लगता है। कभी कभार पुरुष महिलाओं की तरह ओवर इमोशनल हो उठते हैं और एक मिनट में दुखी होते हैं और दूसरे पल में खुश हो जाते हैं। 

मन से टूट जाना

अगर पुरुष में हार्मोन असंतुलन की समस्या नही है तो मूड बदलने की दूसरी आम समस्या उसका मन      से टूट जाना होता है। अगर पुरुष के दिल में धक्का लगा हो तो, वह टूट जाता है और किसी से बात करना पसंद नहीं करता।

 तनाव

कई पुरुष तनाव को ठीक तरह से हैंडल नहीं कर पाते, जिससे उनका मूड खराब हो जाता है। वे एक ओर अच्छे मूड में होते हैं और वहीं दूसरी ओर उनके मूड में तुरंत परिर्वतन देखने को मिल जाता है। उन्हें इस वक्त समझा पाना बडा ही मुश्किल होता है।

चिड़चिड़ाहट 

पुरुषों में चिड़चिड़ापन और मनोदशा झुकाव एंड्रोपोज के आम लक्षण हैं और इसका उल्लेख किया जा सकता है चिड़चिड़ा पुरुष सिंड्रोम (आईएमएस) के रूप में। आईएमएस उच्च कोर्टिसोल स्तरों के कारण हो सकता है और पुरुषों को कार्य करने या उदास होने का कारण बन सकता है। इस स्थिति के बारे में और जानने के लिए, कम टेस्टोस्टेरोन, लक्षण, कारणों और उपचार के साथ इसके कनेक्शन सहित, नीचे पढ़ना जारी रखें।

अपेक्षाओं का दबाव 

पुरुषों पर कई बार अपेक्षाओं का जरूरत से ज्‍यादा दबाव होता है। जिसे वेे संभाल नहीं पाते।  अगर पुरुष में हार्मोन असंतुलन की समस्या नहीं है तो मूड बदलने की दूसरी आम समस्या उसका मन से टूट जाना होता है। अगर पुरुष के दिल में धक्का लगा हो तो, वह टूट जाता है और किसी से बात करना पसंद नहीं करता।

मानसिक आघात

अगर किसी पुरुष को पहले किसी तरह का मानसिक आघात लगा है तो इसके कारण भी मिजाज में बदलाव होता है। अगर पुरुष के दिल में धक्का लगा हो तो, वह टूट जाता है और किसी से बात करना पसंद नहीं करता।

मिथक भी हैं

पुरुषों को ऐसा लगता है कि उनका मूड में बदलाव केवल बेडरूम में होता है। जब वे अपने पार्टनर के साथ खुशनुमा वक्‍त गुजार रहे होते हैं, ऐसे में किसी प्रकार का खलल पड़ने के कारण मूड बदल जाता है। इसके कारण उनका मूड स्विंग होता है और यह तनाव और अवसाद का कारण भी बन सकता है।

 पुरुष भावना रहित होते हैं

यह दूसरा मिथ है जिसमें यह माना जाता है कि, पुरुषों के अंदर भावनायें नहीं होती हैं, और उनका व्‍यवहार बहुत ही कड़क होता है। वे भावनाओं से परे होते हैं, इसके कारण भी उनका मूड अचानक से बदल जाता है। क्‍योंकि कभी वे खुश रहते हैं लेकिन भावनात्‍मक रुझान न होने के कारण वे अगले ही पल दुखी और गुस्‍सा भी हो जाते हैं।

एडीएचडी (ध्यान-घाटे अति सक्रियता विकार):

इस स्थिति से पीड़ित लोगों को आसानी से और अक्सर निराश और निराश किया जा सकता है। वे अक्सर अपर्याप्त महसूस करते हैं और अवसाद से निपटने में असमर्थ होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप अनियमित मूड होते हैं।

सीमा रेखा व्यक्तित्व विकार (बीपीएस):

रोगियों की खुद की और दूसरों के बारे में अशांत भावनाओं के कारण स्थिर संबंध बनाए रखने में असमर्थता की विशेषता। आत्महत्या के प्रयासों का इतिहास मौजूद हो सकता है।

पदार्थों के दुरुपयोग:

अल्कोहल और / या नशीली दवाओं के दुरुपयोग से अप्रत्याशित मूड स्विंग हो सकती है। लोगों की लत उन्हें गलत तरीके से व्यवहार कर सकती है क्योंकि उनकी इच्छाएं अक्सर उनके व्यवहार का मार्गदर्शन करती हैं।

    12. अस्थायी विस्फोटक विकार (आईईडी)

व्यक्ति चरम, अनियंत्रित क्रोध का अनुभव कर सकते हैं और बड़ी हिंसा में सक्षम हैं। वे नुकसान पहुंचाने के लिए जरूरी नहीं हैं लेकिन वैसे भी ऐसा करते हैं।

    13.  रासायनिक असंतुलन:

मस्तिष्क सेरोटोनिन, गैबा, डोपामाइन और नोरेपीनेफ्राइन समेत न्यूरोट्रांसमीटर नामक कई अलग-अलग रसायनों का उपयोग करता है। जब न्यूरोट्रांसमीटर उत्पादन बाधित हो जाता है, तो यह मूड स्विंग्स, अवसाद या अत्यधिक चिंता का कारण बन सकता है।

निष्कर्ष 

अत : उपरोक्त सभी बातो के आधार पर यह कह सकते है , की अक्‍सर ये माना जाता है कि मह‍िलाए बहुत मूडी होती है। मिनटों में उनका मूड बदलता र‍हता है। जिसे मूड स्विंग भी कहा जाता है। कई लोगों को मानना है कि मूड स्विंग की समस्‍या सिर्फ महिलाओं को घेरे रहती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं के साथ मूड स्विंग की समस्‍याएं पुरुषों में भी पाई जाती है। मूड स्विंग की समस्या तनाव, हार्मोनल चैंजेस की वजह से होती है। मूड स्विंग की वजह से आप कब खुश हो जाओं ये कब कब क्रोधित कुछ मालूम ही नहीं चलता है। ये अचानक से आपके हार्मोन में आए बदलाव के वजह से आप रिएक्‍शन देने लगते हैं। महिलाओं में अक्‍सर गुस्‍सा, क्रोधित और तनाव जैसे लक्षणों के वजह से मूड स्विंग के बारे में मालूम किया जाता है। लेकिन पुरुषों में मूड स्विंग के बारे में मालूम करना थोड़ा मुश्किल होता है क्‍योंकि वो अपने अच्‍छे और बुरे मूड के बारे में जाहिर नहीं होने देते है। पुरुषों में होने वाले मूड स्विंग को इरिर्टेबल मेन सिंड्रोम या इरिर्टेबल मेल सिंड्रोम (आईएमएस) कहा जाता है।

About the author

Saransh Sethi

मेरा नाम सारांश है और में एक हेल्थ ब्लॉगर हूँ. मैं हेल्थ से संबधित जानकारी लोगों के साथ शेयर करना पसंद करता हूँ, खासकर पुरुषों से संबधित हेल्थ जानकारी. अगर आप एक पुरुष है तो यह ब्लॉग आपके लिए ही है. इस पर आप अपनी हेल्थ से जुडी सभी तरह की समस्याओं के बारे में और उनके इलाज के बारे में जानकारी पा सकते है.

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