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बच्चों में अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर

बच्चों में अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर
Written by Amisha Bharti

आज के समय में कुछ बच्चों में अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर देखने को मिलता है. आपने अपने आसपास ऐसे बच्चे देखने होंगे जो अक्सर अपने में खोये रहते है, किसी से घुलते-मिलते नहीं है और लोगों से मिलने से दूर भागते है. ऐसे बच्चों में अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर पाया जाता है. जिन बच्चों में यह डिसऑर्डर पाया जाता है वे दोस्त बनाने से बचते है, पड़ोसियों और रिश्तेदारों से घुलते मिलते नहीं है. उनके लिए बस एक कमरा ही उनकी दुनिया होती है.

अगर आप ऐसा सोचते है की बच्चा शर्मीला है और इस वजह से ज्यादा घुलता मिलता नहीं है तो क्या पता शायद आप गलत हो. अगर आपने पूरा ध्यान नहीं दिया तो बच्चे में अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर बढ़ता चला जायेगा जो की बाद में उसके लिए घातक बन सकता है. ऐसे में जरुरी है बच्चों में इसके लक्षण देखकर मनोचिकित्सक से बात करने की. आईये जानते है अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के बारे में.

अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर क्या है?

जब आपका बच्चा खुद में खोया रहता है, दुसरो से मिलता-झूलता नही है, पड़ोसियों और रिश्तेदारों से सभटा है, दोस्त बनाने से बचता है, एक कमरा उसकी दुनिया बन जाता है, ज्यादा सोचता है तो यह सब अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर है. ऐसे में आपको सावधान रहने की जरूरत है और अपने बच्चे पर पूरा ध्यान देने की जरूरत है.

अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के लक्षण

  • बचपन से अकेले रहना.
  • उन्हें रिजेक्शन से डर लगने लगता है और आलोचना सहन नहीं होती.
  • कुछ करीबी दोस्तों के साथ ही रहते है और परिवार तथा रिश्तेदारों से अलग हो जाते है.
  • नए लोगों और रिश्तेदारों से घबराना
  • ज्यादा सोचना
  • लोगों से मिलने में घबराहट होना
  • किसी फंक्शन में शर्मीला रहना और अजीब व्यवहार करना
  • नया करने या चांस लेने से डरना

अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर का इलाज

अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के इलाज के लिए आपको किसी अच्छे मनोचिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए. जिसमे डॉक्टर बच्चे से बात करके एक निष्कर्ष पर पहुँचते है और उस हिसाब से इलाज करते है. हो सकता है कोई दर्द या अतीत का कोई दुःख बच्चे को दर्द पहुंचा रहे है. ऐसे में सब कारणों का पता लगाया जाता है और किस तरह से बच्चे की सोच को बदला जा सकता है उसकी कोशिश की जाती है.

इसमें माँ-बाप, भाई-बहन, दोस्त सबकी मदद लि जाती है. खुद बच्चे से पूछा जाता है. उसे समझाया जाता है. अवसाद और चिता को कम करने के लिए दवाईयां दी जाती है जिससे दिमाग शांत रहे. ऐसे मामले में समय रहते बच्चे का इलाज करना बेहद जरुरी है अन्यथा बाद में बहुत दिक्कत हो सकती है.

अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के लक्षण दिखने पर क्या करें  

  • बच्चे को प्यार से समझाएं और उससे ऐसे व्यवहार की वजह पूछे.
  • बच्चों के साथ जबरदस्ती नजदीकी बढाने वाले इंसान पर नजर रखें.
  • बच्चो से उनके भूतकाल के बारे में बात ना करें.
  • बच्चे को हमेशा कम्फर्टेबल फील कराएँ उसे कभी यह नहीं लगना चाहिए की उस पर दबाव बनाया जा रहा है.
  • आपका बच्चा क्या कर रहा है, कहाँ रह रहा है, किससे मिल रहा है इन सब पर नजर रखे लेकिन बच्चे को इसका पता नहीं लगना चाहिए.
  • बच्चे में अगर अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के लक्षण दिखने लगे तो उसे कभी भी अकेला ना छोड़े.
  • बच्चे से हमेशा प्यार से बर्ताव करें.
  • उसमे दुनिया और लोगो की समझ विकसित करें. उसे सफलता और असफलता के बारे में समझाएं. उसे हार और जीत के बारे में बताएं.
  • बच्चे को दुनिया से लड़ना सिखाएं. डर का सामना करना सिखाएं.
  • बच्चे को पर्याप्त समय दे ताकि उसे कभी भी अकेला महसूस ना हो.

About the author

Amisha Bharti

मैं अमीषा पेशन से एक हेल्थ ब्लॉगर हु. मैं अपने ब्लॉग में लोगों को बीमारियों से मुक्ति दिलाने के तरीकों के बारे में बताती हूँ. आप मेरे ब्लॉग से हेल्थ से संबधित सभी तरह की जानकारी पा सकते है.

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