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बच्चेदानी में गाँठ होने के कारण, लक्षण और इलाज

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Written by Surbhi

उम्र के साथ-साथ महिलाओं में बीमारियाँ बढ़ने लगती है और ज्यादातर महिलाओं में गर्भाशय से संबधित बीमारियाँ होने का खतरा ज्यादा रहता है. कोई अनियमित माहवारी से परेशान है तो कोई यौन रोग से ग्रसित है. महिलाओं की बच्चेदानी में गाँठ होना भी एक खतरनाक रोग है. बहुत सारी महिलाएं ऐसी होती है जिन्हें अपने जीवनकाल में कभी ना कभी बच्चेदानी में गाँठ होती है.

महिलाओं की बच्चेदानी में गाँठ होना बहुत ही खतरनाक रोग है और इस वजह से उनकी माँ बनने की क्षमता भी प्रभावित होती है और कई मामलों में महिला गर्भवती भी नहीं हो पाती है. बच्चेदानी में गाँठ होना महिलाओं के लिए एक आम समस्या है लेकिन अगर यह विकराल रूप ले ले तो कैंसर तक हो सकता है और जानलेवा भी हो सकता है.

कई बार तो ऐसा भी होता है महिलाओं की बच्चेदानी में गाँठ होती है और उन्हें इस बात का पाता ही नहीं चलता है क्योंकि इसमें अक्सर किसी तरह का दर्द या लक्षण साफ़ दिखाई नहीं देते. ऐसे में सवाल पैदा होता है की आखिर हमें पाता कैसे चलेगा की हमें बच्चेदानी में गाँठ हुयी या नहीं, तो आज की यह पोस्ट आपके लिए ही है. आज की इस पोस्ट में हम आपको बच्चेदानी में गाँठ होने के कारण, लक्षण और इलाज के बारे में बताएँगे.

बच्चेदानी में गाँठ होने का मतलब क्या है?

बच्चेदानी में गाँठ होने का मतलब है छोटे-छोटे ट्यूमर होना. यह छोटे-छोटे ट्यूमर गर्भाशय की कोशिकाओं और कोशिकाओं को जोड़ने वाले रेशेदार उतकों से बनी होती है. हालाँकि बच्चेदानी में गाँठ होना मतलब कैंसर नहीं है और इसका गर्भाशय के कैंसर से कोई संबध नहीं है.

बच्चेदानी में होने वाली गांठो का आकार अलग-अलग होता है जैसे कुछ गांठे ऐसी होती है जो व्यक्ति अपनी आँखों से देख भी नहीं सकता है और कुछ गांठे इतनी बड़ी होती है की वे महिलाओं के गर्भाशय को फैला सकती है. किसी महिला की बच्चेदानी में एक या कई सारी गांठे हो सकती है और कुछ में तो महिलाओं को पाता भी नहीं चलता है की उनके बच्चेदानी में कोई गाँठ हुयी है, क्योंकि इसका कोई साफ़ लक्षण दिखाई नहीं देता है. इन ट्यूमर और गांठो को फाइब्राएड भी कहते है. 

बच्चेदानी में गाँठ होने के लक्षण
Bachedani Mei Ganth Ke Lakshan in Hindi

  • मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होना.
  • शारीरिक संबध बनाते वक्त दर्द होना.
  • शारीरिक संबध बनाते समय योनी से खून निकलना.
  • मासी धर्म पूरा होने के बाद भी रक्तस्राव होना.
  • अनियमित मासिक धर्म.
  • पेट में सुजन आना या पेट का आकार बढ़ना.
  • पेशाब करने में परेशानी होना.
  • कब्ज होना.
  • पेट के नीचे वाले हिस्से में दर्द रहना.
  • बांझपन की परेशानी होना.
  • पीठ में दर्द रहना.
  • पैरों में दर्द होना.
  • बार-बार पेशाब आना.
  • एनीमिया.
  • मासिक धर्म के दौरान तेज दर्द होना.
  • शरीर में कमजोरी महसूस होना.
  • योनी से बदबूदार डिस्चार्ज होना.
  • किसी भी तरह का हार्मोनल बदलाव.

बच्चेदानी में गाँठ होने कारण
Bachedani Mei Ganth Ke Karan in Hindi

  • आनुवंशिक कारण.
  • मोटापा.
  • एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में वृद्दि होना.
  • लम्बे समय तक सन्तान ना होना.
  • अगर 10 साल की उम्र से पहले मासिक धर्म होना शुरू हो जाते है.
  • विटामीन D की कमी से.
  • ज्यादा रेड मीट खाने से.
  • शराब पीने से.

बच्चेदानी में गाँठ बन सकती है बांझपन का कारण?

अगर बच्चेदानी में गाँठ हो जाती है तो इस वजह से अंडाणु और शुक्राणु आपस में मिल नहीं पाते है जिसकी वजह से बच्चा पैदा करना मुश्किल होता है और इस वजह से बांझपन की समस्या हो जाती है. जिन महिलाओं की शादी 35-40 साल की उम्र में होती है उनमे इसका खतरा ज्यादा रहता है. 

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बच्चेदानी में गाँठ का इलाज
Bachedani Mei Ganth Ka Ilaaj in Hindi

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बच्चेदानी में गाँठ (फाइब्राइड) के इलाज के लिए पहले चीरा लगाया जाता था लेकिन उसमे घाव भरने में टाइम लगता था लेकिन आजकल दूरबीन के द्वारा इलाज आसानी से संभव है बिना किसी दर्द के. लेप्रोस्कोपी विधि के द्वारा सर्जरी एक तरह से महिलाओं के लिए वरदान है. बच्चेदानी में होने वाली गांठे कैंसर का रूप नहीं लेती इसलिए इनका इलाज आसानी से हो जाता है.

पहले इसके लिए ओपन सर्जरी होती थी जिसमे महिला को स्वस्थ होने में एक महीने या उससे ज्यादा का समय लग जाता था लेकिन अब लेप्रोस्कोपी तकनीक के द्वारा इस बीमारी का इलाज आसानी से और जल्दी में संभव हो गया है. इसमें महिला जल्दी स्वस्थ भी हो जाती है और ज्यादा दर्द भी नहीं होता है.

अगर बच्चेदानी में गाँठ के अगर महिला में कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहे है तो उसे निगरानी रखते हुए उनमे वृद्दि का इन्तजार करना चाहिए. गाँठ के लक्षण पाता चलने पर डॉक्टर पेल्विक जांच और अल्ट्रासाउंड करवाने को कह सकता है. इसके बाद इलाज के तौर पर सर्जरी की जा सकती है. इसके अलावा दवाओं से भी इसका इलाज किया जा सकता है. इसमें डॉक्टर आपकी उम्र, गांठो का आकार और आपकी हेल्थ के अनुसार इलाज की सलाह देता है.

इसके अलावा खाने-पीने में ध्यान दे जैसे ग्रीन टी पीयें, इससे बच्चेदानी की गाँठ को दूर किया जा सकता है. हरी सब्जियां, पोषण युक्त आहार, फल-फ्रूट, जूस आदि का सेवन करें. प्याज और हल्दी जैसे एंटी-ओक्सिडेंट और एंटीबायोटिक तत्वों जा सेवन करें जिससे बच्चेदानी में गाँठ को कण्ट्रोल किया जा सके. मीट और ज्यादा कैलोरी वाले खाद्ध पदार्थों को ना खाएं.

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Surbhi

मेरा नाम सुरभि है और ब्लोगिंग मेरा पेशन है. में अपने ब्लॉग पर आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों के बारे में बताती हु. आप सभी जानते है की आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खे हमारे लिए कितना फायदेमंद है और इनका किसी तरह का साइड इफ़ेक्ट नहीं है. इसलिए में अपने ब्लॉग पर आपको आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों के बारे में बताउंगी ताकि आप इन्हें अच्छे से जान सके और बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के खुद में बदलाव ला सके.

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