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गोइटर (Goiter): घेंघा रोग की सबहिं जानकारी

बदलती जीवनशैली और लाइफस्टाइल की वजह से आज ना जाने कितनी बीमारियों ने हमारे शरीर में जगह बना रखी है. रोजाना नई-नई बीमारियाँ आ रही है ओत लोग उसकी चपेट में आ रहे है. इसका मुख्य कारण गलत लाइफस्टाइल और खराब खानपान है. इसी की वजह से हमारा प्रतिरक्षा तन्त्र कमजोर पड़ता है और हमारा शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम नहीं रहता है. 

जब शरीर का रोग-प्रतिरोधक सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तन्त्र ही कमजोर हो जायेगा तो बीमारियाँ अपने आप शरीर को घेरने लगेगी. ऐसी कई बीमारियाँ है जो लोगों को लम्बे समय तक अपनी चपेट में रखती है और कुछ बीमारियाँ तो ऐसी होती है जो मौत पर ही खत्म होती है जैसे कैंसर.

आज हम ऐसी एक लम्बी अवधि वाली बीमारी घेंघा रोग के बारे में जानेंगे. घेंघा जिसे गलगंड भी कहते है. आपने घेंघा नाम नहीं सूना  होगा लेकिन गलगंड सूना होगा, जबकि दोनों एक ही है. आज हम आपको घेंघा रोग के बारे में बताएँगे. आईये जानते है घेंघा रोग क्या है?

घेंघा रोग क्या है? | What is Goiter in Hindi

घेंघा रोग आयोडीन की कमी से होने वाला रोग है. यह रोग गर्दन में सूजन के कारण होता है. अगर आपके गर्दन में थोड़ी सी भी सूजन है तो आप इसे नजरअंदाज ना करें अन्यथा बाद में यह भयंकर बीमारी घेंघा रोग बन सकती है. थायराइड ग्रन्थि के आकार बढ़ने को घेंघा यानी गलगंड कहा जाता है.

थाइराइड एक तितली के आकार की ग्रन्थि होती है जो गर्दन के अंदर ठीक कालरबोन के उपर स्थित होती है. हालाँकि घेंघा रोग दर्द रहित होता है लेकिन अगर इस दौरान थाइराइड ग्रन्थि का आकार ज्यादा बढ़ गया तो बाद में निगलने में, सांस लेने में, खांसी आदि में दिक्कत हो सकती है. 

घेंघा रोग के लक्षण क्या है? | Symptoms of Goiter in Hindi

  • निगलने में दिक्कत होना 
  • सांस लेने में परेशानी होना 
  • खांसी करने में कठिनाई होना 
  • गला बैठ जाना 
  • बार-बार खांसी होना 
  • बाजू उपर करने पर सिर घूमना और चक्कर आने जैसा महसूस होना 
  • सिर दर्द 
  • जहां सूजन होती है वहां खुजली होने लगती है 
  • गले में चुभन होना 
  • गला सुखा-सुखा सा लगना 
  • गले में कुछ फंस जाना 
  • आवाज में बदलाव होना 
  • गला बैठ जाना 
  • सांस लेने के दौरान तेज आवाज निकलना

घेंघा रोग के प्रकार | Types of Goiter in Hindi

  • डीफ्युस स्माल गोइटर :- इसमें पूरी थायराइड ग्रन्थि का आकार बढ़ जाता है और छुने पर नरम महसूस होती है. 
  • नोड्युलर गोइटर :- इसमें पूरी थायराइड ग्रन्थि का आकार नहीं बढ़ता बल्कि थायराइड के कुछ हिस्सों का आकार बढ़ जाता है या गाँठ बन जाती है. उन्हें छुने पर उभार महसूस होता है.

इसमें डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए? 

कुछ ऐसी स्थिति है जब आपके साथ नीचे दी गई कोई चीज होने लगे तो आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

  • सांस लेने में ज्यादा दिक्कत होने लगे 
  • निगलने में कठिनाई होने लगे 
  • कामेच्छा में कमी होना मतलब शारीरिक संबध बनाने का मन नहीं करना 
  • मांसपेशियों में एंठन होना
  • याददाश्त खोना 
  • बाल झड़ना 
  • अनियमित मासिक धर्म 

ऐसा कुछ आपके साथ होने लगे तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए क्योंकि किसी बड़ी बीमारी के संकेत हो सकते है. 

घेंघा रोग के कारण | Causes of Goiter in Hindi

  • इसका मुख्य कारण तो आयोडीन की कमी ही है. आयोडीन की कमी की वजह से ही घेंघा यानी गलगंड होता है. 
  • जब आपकी थायराइड ग्रन्थि बहुत अधिक मात्रा में थायरोक्सीन हार्मोन बनाने लगती है तब घेंघा रोग होता है. 
  • इसके विपरीत जब आपकी थायराइड ग्रन्थि कम मात्रा में थायरोक्सीन हार्मोन बनाने लगती है तब घेंघा रोग होता है. 
  • थायराइड ग्रन्थि में हल्की गाँठ होने पर 
  • गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से 
  • घेंघा रोग पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा होता है.
  • उम्र बढ़ने के साथ-साथ इसका खतरा बढ़ता जाता है.
  • छाती या गर्दन के आसपास रेडिएशन थैरेपी होने की वजह से घेंघा रोग का खतरा बढ़ जाता है. 
  • कुछ ऐसी दवाइयां है जिनके साइड इफ़ेक्ट से घेंघा रोग हो सकता है. 
  • पत्ता गोभी और फुल गोभी के अधिक सेवन से घेंघा रोग हो सकता है.
  • अगर आपके परिवार में किसी को घेंघा रोग हो सकता है तो आप भी इसकी चपेट में आ सकते है. 

घेंघा रोग की जांच | Diagnosis of Goiter in Hindi 

  • इसमें डॉक्टर पहले आपसे लक्षणों के बारे में पूछेगा.
  • गर्दन की जांच होगी जैसे सूजन आदि का पता लगाया जायेगा.
  • थायराइड फंक्शन टेस्ट जिसमे थायराइड हार्मोन के स्तर की जांच होगी
  • फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलाजी 
  • अल्ट्रासाउंड 
  • ब्लड टेस्ट 

घेंघा रोग का इलाज | Treatment of Goiter in Hindi  

  • अगर आयोडीन की कमी से घेंघा रोग हुआ है तो आयोडीन से भरपूर खाद पदार्थ खाने की सलाह दी जाती है जैसे आयोडीन युक्त नमक आदि. 
  • थायराइड ग्रन्थि के कार्यों को धीमा करने वाली दवाइयां दी जाती है.
  • अगर दवाइयां काम ना करें तो फिर सर्जरी की जाती है जिसमे थायराइड ग्रन्थि का एक हिस्सा या पूरी थायराइड ग्रन्थि बाहर निकाल दी जाती है.
  • रेडियोएक्टिव आयोडीन थैरेपी की जाती है जिसमे थायराइड हार्मोन बनाने वाले सभी या कुछ कोशिकाओं को नष्ट कर दिया जाता है.
  • हार्मोन रिप्लेसमेंट थैरेपी से भी इसका इलाज किया जा सकता है. 
  • रेडियोएक्टिव आयोडीन को मुहं के द्वारा थायराइड ग्रन्थि तक पहुँचाया जाता है तब यह थायराइड की कोशिकाओं को नष्ट करके घेंघा रोग के आकार को छोटा कर देता है. लेकिन इसका साइड इफ़ेक्ट यह है की इससे थायराइड ग्रन्थि अंडरएक्टिव हो सकती है. 

घेंघा रोग की जटिलताएं | Risks Linked with Goiter in Hindi

  • मिसकैरेज
  • समय से पहले बच्चे का जन्म 
  • बांझपन 
  • कोलेस्ट्रोल का लेवल बढ़ना 
  • डिप्रेशन 
  • धुंधला दिखाई देना 
  • हृदय रोग 
  • डबल दिखाई देना 

घेंघा रोग में किन चीजों से परहेज करना चाहिए? | What NOT to Eat When You Have Goiter Disease?

  • पत्ता गोभी 
  • फुल गोभी 
  • आडू
  • मूंगफली 
  • मैदे की चीजे 
  • सफ़ेद शक्कर 
  • तली हुयी चीजें 
  • सरसों का साग
  • पालक 
  • शराब 
  • धुम्रपान 
  • कॉफ़ी
  • मक्का 
  • मुली

घेंघा रोग में किन चीजों का सेवन करना चाहिए? | What to Eat When You Have Goiter Disease?

  • पुराने चावल 
  • लहसुन 
  • जौ
  • मुंग दाल
  • पटोला
  • सहजन
  • ककड़ी
  • गन्ने का रस
  • दूध और दूध से बने उत्पाद
  • गाजर 
  • टमाटर
  • साबुत चावल 
  • प्याज 
  • अमरुद 
  • खट्टे फल 
  • अंडे
  • अन्नानास
  • केले

गोइटर से बचाव के उपाय | Treatment of Goiter in Hindi

  • अगर गोइटर ज्यादा गंभीर नहीं है तो आयोडीन युक्त आहार लेकर इसकी रोकथाम की जा सकती है. 
  • हर स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की जरूरत पड़ती है और यह मात्रा साधारण आयोडीन युक्त नमक से पूरी की जा सकती है.
  • गर्भवती और स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को आयोडीन की सख्त जरूरत होती है, इस बात का ख़ास ध्यान रखें. 
  • आयोडीन को अधिक मात्रा में खाना भी हानिकारक है क्योंकि इसको अधिक मात्रा में लेने से थायराइड ग्रन्थि अधिक थायरोक्सीन हार्मोन स्त्रावित करने लग जाएगी जिससे गोइटर हो सकता है.
  • जीवनशैली में बदलाव करें और पोषक आहार ले. 
  • नशे, तम्बाकू और धुम्रपान से दुरी बनाये रखें. 

गोइटर का घरेलू उपचार | Home Remedies for Goiter in Hindi

1. अलसी के बीज जा पेस्ट 

अलसी के बीज में थोड़ा सा पानी डालकर उसका पेस्ट तैयार कर ले. इस पेस्ट को गले में सूजन वाले हिस्से पर लगायें और आधा घंटे तक रहने दे. अलसी में इंफेल्मेट्री का गुण पाया जाता है जिससे सूजन में कमी आती है.

2. गले की एक्सरसाइज़ करें 

गले से जुड़े व्यायाम करने से गोइटर (गलगंड) में आराम मिलता है. इसमें गर्दन को ढीला छोड़ने, खींचने या इससे मिलते-जुलते व्यायाम कर सकते है. 

3. जौ का पानी 

गोइटर होने पर जौ का पानी पीयें. इसमें पर्याप्त मात्रा में एंटीओक्सिडेंट और जरुरी पोषक तत्व होते है जो शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत करते है जिससे शरीर को रोगों से लड़ने की ताकत मिलती है.

4. ठंडे पानी से नहायें 

गोइटर होने पर दिन में दो बार ठंडे पानी से नहायें, इसके लिए आप शावर ले तो ज्यादा अच्छा रहेगा. इससे सूजन कम होगी. यह नुस्खा गोइटर के लिए बहुत प्रभावी है. 

5. आयोडीन युक्त आहार ले 

गोइटर होने का सबसे प्रमुख कारण आयोडीन की कमी ही है. इसलिए आयोडीन युक्त आहार जैसे चावल, जौ, लहसुन, ककड़ी, गन्ने का रस, दूध, दूध से बने उत्पाद, गाजर, टमाटर, प्याज, अन्नानास, अमरुद, अंडे, केले आदि का सेवन करें. 

6. इन चीजों से परहेज करें 

गोइटर होने पर मैदे की चीजें, सफ़ेद शक्कर, मांस, तली हुयी चीजें, पता गोभी, फुल गोभी, चाय, कॉफ़ी, शराब, सरसों का साग आदि का सेवन ना करें. 

7. अन्नानास का सेवन करें 

अन्नानास में काफी विटामीन और मिनरल्स पाए जाते है जो गोइटर में होने वाली सूजन को कम करने में मदद करते है और साथ ही इसके लक्षणों को भी कम करने में मदद करता है. 

8. लहसुन 

आयुर्वेद में लहसुन को ओषधिय गुणों की खान बताया गया है. कई रोगों को दूर करने में लहसुन बहुत फायदेमंद है. लहसुन शरीर में ग्लूटोथाइन के निर्माण को बढाता है जो थायराइड की गतिविधि को बढाता है, इससे गोइटर में आराम मिलता है. 

9. ग्रीन टी 

ग्रीन टी में प्राकृतिक फ्लूयोराइड होता है जो थायराइड ग्रन्थि को स्वस्थ रखता है. इसके अलावा ग्रीन टी में कई ऐसे एंटीओक्सिडेंट गुण होते है जो आपको स्वस्थ रखते है और गोइटर की समस्या से निजात दिलाने में मदद करते है. 

इन सभी चीजों का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरुर ले ले. आज की इस पोस्ट में आप अच्छे से समझ गए की घेंघा रोग क्या है, इसके लक्षण क्या है, इसके प्रकार ओ कारण क्या है, इसकी जांच और इलाज क्या है तथा किन चीजों का सेवन करना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए. 

उम्मीद करता हूँ की आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी और अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और कमेंट बॉक्स में अपने विचार दे ताकि हम आगे भी ऐसी अच्छी से अच्छी पोस्ट आपके बीच में ला सके.

About the author

Surbhi

मेरा नाम सुरभि है और ब्लोगिंग मेरा पेशन है. में अपने ब्लॉग पर आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों के बारे में बताती हु. आप सभी जानते है की आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खे हमारे लिए कितना फायदेमंद है और इनका किसी तरह का साइड इफ़ेक्ट नहीं है. इसलिए में अपने ब्लॉग पर आपको आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों के बारे में बताउंगी ताकि आप इन्हें अच्छे से जान सके और बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के खुद में बदलाव ला सके.

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