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मानसून साथ लता है ये बीमारियों- इन 6 बीमारियों से बचें

मानसून-में-होने-वाली-बीमारियों-की-जानकारी
Written by Saransh Sethi

मानसून का मौसम मतलब बीमारियों का मौसम, क्योंकि बैक्टीरिया, वायरस,मच्छर सबके लिए अनुकूल वातावरण जो प्रदान करता है। वैसे तो इस मौसम में कोई भी बीमार हो सकता है, पर बच्चो को लेकर खास सावधानी बरतनी पड़ती है। एक तो बच्चे जल्दी से सुनते नही,उनको हैल्थी खाना खिलाना,घर मे सुरक्षित रखना बहुत ही मुश्किल फिर उनकी इम्युनिटी भी इतनी स्ट्रांग नही होती।

मानसून में होने वाली बीमारियों की जानकारी- Monsoon Diseases in Hindi

1. डेंगू- Dengue

शुरुआत में जितना सामान्य बुखार जैसा लगता है बढ़ने पर उतना ही खतरनाक हो जाता है।

इसकी स्थिति बिगड़ने पर मरीज की जान बचाना मुश्किल हो जाता हैं, और कई बार मरीज की मृत्यु तक हो जाती हैं।

डेंगू बुखार मादा एडीज एजिप्टी मच्छरों के काटने से होता है। ये जुलाई से अक्टूबर में फैलता है क्योंकि यह समय इन मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। इन मच्छरों के शरीर पर काली सफेद रंग की धारिया होती है।डेंगू से पीड़ित किसी इंसान को जब ये मच्छर काटता है तो खून के साथ ये वायरस भी मच्छर के शरीर मे चला जाता है। जब यहीं मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो उसे भी डेंगू हो जाता है। एक बार काटने से ही इन्फेक्शन फैल सकता है।

डेंगू के लक्षण- Symptoms of Different types on Dengue in Hindi

  • साधारण डेंगू– ठंड कर साथ तेज बुखार हो जाता है, सरदर्द,आँखों मे दर्द,व्यक्ति जब आँखे हिलाए या दबाए तो दर्द में बढ़ोत्तरी होती है। मसल्स और जॉइंटस में दर्द होता है,कमजोरी लगती हैं, मुँह में कड़वापन,गले मे भी दर्द होता है। चेहरे ,गर्दन,और छाती पर रैशेस हो जाते है।
  • डेंगू हैमरेजिक बुखार– इसमे नाक मुँह और मसूड़ों से खून आने लगता है, मरीज को बहुत प्यास लगती हैं,स्किन पर घाव हो जाते है,स्किन ठंडी हो जाती है,मरीज कराहता रहता है,खून या बिना खून की उल्टी हो सकती है,सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती हैं,
  • डेंगू शॉक सिंड्रोम– इसमे शॉक जैसी स्थिति हो जाती है,ब्लड प्रेशर एकदम लो हो जाना,बुखार होने पर भी शरीर ठंडा होना, मरीज का होश खोना आदि लक्षण होते है,नब्ज तेज चलने लगती है।

2. हैजा- Cholera

हैजा या विषूचिका या कॉलरा एक गम्भीर संक्रामक रोग है जो विब्रियो कोलेरी नामक जीवाणु से दूषित भोजन या पानी पीने से होता है।

इसमे व्यक्ति को बहुत पतले दस्त होते हैं ,धीरे धीरे शरीर मे पानी को कमी खतरनाक स्तर तक पहुँच जाती है।बच्चे और गर्भवती महिला इसका शिकार आसानी से बनती है साथ ही जिन लोगो का उदर कमजोर होता है उन्हें भी ये आसानी से हो जाता है।

हैजा के कारण- Causes behind Cholera in Hindi

  •  जीवाणु से दूषित भोजन या पानी
  •  मक्खियां पीड़ित व्यक्ति के मल पर बैठ कर जीवाणु को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाती है।
  •  नगर निगम द्वारा गन्दे पानी की सप्लाई
  •  बाहर रखे कटे फल,ठेलों पर रखा खुला खाना खाने से

हैजा के लक्षण- Symptoms of Cholera in Hindi

  •  अत्यधिक पतले दस्त होना
  •  उल्टी होना
  •  पैर और पेट मे ऐंठन होना
  •  ब्लड प्रेशर लो होना
  •  ज्यादा प्यास लगना
  •  शरीर मे खुश्की
  •  पेशाब कम आना
  •  बुखार जैसा महसूस करना

Dhyaan de: उपचार सबसे जरूरी है पानी की कमी की पूर्ति करते रहे.

3. मलेरिया- Malaria

मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है, ये मच्छर जब काटता है तो प्लासमोडियम नामक पैरासाइट को काटते समय व्यक्ति के खून प्रवेश कर जाता है और व्यक्ति को मलेरिया हो जाता है।

मलेरिया के लक्षण- Symtpoms of Malaria

  1.  ठंड कंपकंपी के साथ बुखार आना
  2.  उल्टी जैसा लगना या उल्टी होना
  3.  सर, कमर को मांसपेशियों में तीव्र दर्द
  4.  ज्यादा स्थिति बिगड़ने पर मरीज बेहोश हो सकता है, सांस लेने में तकलीफ हो सकती हैं।
  5.  पेशाब कम होना
  6.  बहुत पसीने के साथ बुखार उतरना

4. टायफॉइड- Typhoid

टायफॉइड जिसे मियादी ज्वर भी कहते हैं साल्मोनेला टायफी नामक जीवाणु से होता है। यह बीमार व्यक्ति की मल से संक्रमित पानी और भोजन के सेवन से होता है।

टायफॉइड के लक्षण- Symptoms of Typhoid in Hindi

  1.  103 से 104 डिग्री बुखार होता है।
  2.  पेटदर्द,सरदर्द,कमजोरी
  3.  शरीर पर गुलाबी चक्कते

5. चिकनगुनिया- Chikungunya Virus Infection

चिकनगुनिया को हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं क्योंकि इसके ठीक होने के बाद भी महीनों और कभी कभी सालो तक जोड़ो में दर्द रहता है।

एडीज मच्छर के काटने से अल्फा विषाणु को मानव शरीर मे प्रवेश करता है और डेंगू से मिलते जुलते लक्षण प्रकट होते हैं।

चिकनगुनिया के लक्षण- Symptoms of Chikungunya in Hindi

  1.  अचानक बुखार
  2.  हड्डी मांसपेशियों में दर्द
  3.  अनिंद्रा
  4.  प्रकाश से दिक्कत
  5.  सरदर्द
  6.  निर्बलता
  7. बुखार होने पर ज्यादा से ज्यादा आराम करें, स्वंय इलाज ना करे।

6. पीलिया- Jaundice

पिलिया में ब्लड में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है

पीलिया के कारण- Causes of Jaundice in Hindi

  1. पित्त नली की सूजन
  2. लिवर की क्रोनिक सूजन
  3. एनीमिया
  4. गिल्बर्ट सिंड्रोम

पीलिया के लक्षण- Symptoms of Jaundice in Hindi

  1.  त्वचा और आँखों का पीला रंग
  2.  उल्टी
  3.  पीला मूत्र
  4.  पेटदर्द

इसके अलावा वायरल फीवर,आंत्रशोथ,भी इस मौसम में बहुत ही आसानी से चपेट में लेते है।

मानसून की बीमारियों से बचाव- How to Stay Safe During Rainy Season in Hindi?

  • अगर घर मे कूलर है तो उसका पानी बदलते रहे कम से कम सप्ताह में दो बार।  बच्चो को पूरी बाजू के कपड़े पहनाए इसी प्रकार निक्कर या शॉर्ट्स की जगह फुल पैंट या पजामी पहनाए
  • अगर आपकी छत या आँगन में कही भी कोई टायर,डब्बा,फालतू बाल्टी, घड़ा , बोतल जैसा कोई भी बर्तन रखा हो जिसमें पानी इक्कठा होता हो उसे तुरंत हटा दे।
  • मच्छर नाशक दवाई एवम वस्तुओं का प्रयोग करें।
  • आंगन में कोई छोटा गड्ढा बना हो उसे भर दे।
  • नारियल का खोल गड्ढा खोद कर दबा दे।
  • टँकीयो और बर्तनों को ढककर रखे।
  • घर मे कीटनाशक छिड़कते समय मुँह ढक ले,बच्चो को दूर रखें,खाने का सामान ढक दे।
  • मच्छरदानी का प्रयोग करे,मरीज के लिए तो जरूर करें ताकि मच्छर उसको काटकर बीमारी ना फैला सके।
  • सरकार भी कीटनाशकों का समय समय पर छिड़काव करती है,सरकारी विभाग का सहयोग करे।

कोई भी लक्षण दिखने स्वयं से कुछ ना करें; एस्पिरिन, आईब्रूफेन बिल्कुल ना दे। डॉक्टर के पास ले जाने तक बुखार के लिए पैरासिटामोल दे सकते है।  बच्चो के स्कूल प्रशासन से भी ध्यान रखने को कहे।

अगर आप किसी ऑफिस के हेड है तो आपकी जिम्मेदारी है की इन सब बातों का ध्यान रखे।

जहाँ पानी भरा हो वहां केरोसिन,मिट्टी का तेल डालें  नीम की पत्तियां जलाए,  कीटनाशक का छिड़काव केवल ऊपरी तौर पर नही घर के अंदुरुनी और छुपे हुए हिस्सो में भी करें।  खिड़की,दरवाजो पर बारीक जाली लगवाए।

घरेलु उपाय- Home Remedies in Hindi

  • घरेलू एंटीबायोटिक जैसे हल्दी,दालचीनी ,अदरक,तुलसी इनका प्रयोग बढ़ा दे।  स्वच्छ खाए स्वस्थ रहे।
  • इस मौसम में बाहर का खाना, ज्यादा तला हुआ,मसालेदार ना खाएं।
  • पूरे मानसून सीजन में पानी उबाल कर पिए।
  • इस मौसम में बैक्टीरिया बहुत जल्दी पनपते है इसलिए बासी खाना ना खाएं चाहे वो फ्रिज का ही क्यों ना हो।
  • इस मौसम में हरी पत्तेदार सब्जियां,ज्यादा ठंडा पानी,रात में दही बिल्कुल ना ले।
  • तुलसी,काली मिर्च, अदरक, गिलोय, एलोवेरा, आँवला का प्रयोग करें
  • बारिश में भीगने से बचे।
  • बेवक्त ना नहाए।
  • घर के आसपास की झाड़ियां काटकर साफ कर दे।
  • नीम का तेल भी पानी मे मिलाकर स्प्रे कर सकते है
  • पानी मे क्लोरीन मिला सकते हैं
  • डी डी टी का छिड़काव भी मददगार होता है।
  • घर मे तुलसी के पौधे लगाए
  •  मच्छर ,मक्खी वाले स्थानों पर नीम की पत्तियां जलाए
  • पशुओं को रखने वाले स्थान को साफ रखें

 मैडिटेशन करे, केवल शारीरिक नही मानसिक रूप से मजबूत बने।  बच्चो को हर समय घर मे नही रख सकते इसलिए उन्हें इम्युनिटी बढ़ाने वाले पदार्थ दे।  रोजाना पूरापरिवार सुबह की शुरुआत तुलसी के पत्ते खाने से करे।

मानसून में इन् पदार्थों का सेवन करें- Food to Eat During Monsoon in Hindi

  •  बाहर से आने पर और साफ सफाई के बाद साबुन और पानी हाथ धोए
  •  फल और सब्जियों को भली प्रकार धोकर ही उपयोग करे
  •  खाना अच्छी तरह से पका कर ही खाएं
  •  खुले में शौच ना करे
  •  जंक फूड ना खाएं
  •  बर्फ भी साफ पानी की जमाए
  •  हल्का सुपाच्य भोजन ले।
  •  बच्चो को ज्यादा देर गीला ना रहने दे।
  •  आजकल बाजार में मिलने वाले रोलऑन बच्चो के कपड़ो पर लगाकर बाहर भेजे।
  •  डस्टबीन में गीला सूखा कचरा अलग रखें, और ढक कर रखे।
  • इस मौसम में कभी हल्की ठंड कभी गर्मी लगती है तो ए सी का टेम्परेचर सामान्य रखे।  दूध अच्छी तरह उबाल कर प्रयोग करे । खीरा, ककड़ी, छाछ, लोंग, निम्बू, पुदीना, मेथी, कपूर, फिटकरी , सौंफ का प्रयोग पानी मे करे।
  • खांसी होने पर भी अपनी मर्जी से कोई दवा ना ले, फ्रिज का पानी और बासी रखा खाना ना खाए।
  • बाजार में मिलने वाले कटे फल,जूस,चाट इत्यादि ना खाएं।  इस मौसम में शरीर को इम्युनिटी की बहुत जरूरत होती है तो किसी भी प्रकार की क्रैश डायटिंग, ओवर एक्सरसाइज से बचें। टीकाकरण कराए ।

About the author

Saransh Sethi

मेरा नाम सारांश है और में एक हेल्थ ब्लॉगर हूँ. मैं हेल्थ से संबधित जानकारी लोगों के साथ शेयर करना पसंद करता हूँ, खासकर पुरुषों से संबधित हेल्थ जानकारी. अगर आप एक पुरुष है तो यह ब्लॉग आपके लिए ही है. इस पर आप अपनी हेल्थ से जुडी सभी तरह की समस्याओं के बारे में और उनके इलाज के बारे में जानकारी पा सकते है.

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