Health and Diseases Women's Health

महिलाओं की सामान्य सन्वास्थ्य समस्याएं

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Written by Amisha Bharti

यू तो शरीर में कब और कौन -सा रोग लग जाए – कहना कठिन है, फिर भी कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो महिलाओं को आमतौर पर पीड़ित रहती हैं, किंतु वे कुछ तो परंपरागत सामाजिक व्यवस्था और कुछ स्वाभाविक शर्म व संकोच के कारण किसी से कह नहीं पातीं और चुपचाप पीड़ा सहती रहती हैं, घुटती रहती हैं। इस का दुष्परिणाम यह होता है कि रोग बढ़ जाता है और कभी -कभी असाध्य भी हो जाता है।

महिला स्वास्थय क्यों है ज़रूरी ?

महिलाओं का स्वास्थ्य मानव सभ्यता और स्वास्थ्य प्रबंधन का एक अभिन्न अंग है क्योंकि महिलाएँ मानव समाज का लगभग आधा भाग हैं। कई स्वास्थ्य मामलों में महिलाएँ पुरुषों के अनुकूल मानक रखती हैं, जैसे कि स्वास्थ-बर्धक खान-पान या हानिकारक खान-पान के मानक महिलाओं और पुरुषों पर लगभग समान हैं। फिर भी प्रकृति ने जन्म से स्त्री-पुरुष के शरीर और स्वास्थ्य में कई बारीकियाँ और अंतर रखी हैं। तुलनात्मक दृष्टि से एक नवजात लड़की लड़के से अधिक अच्छा स्वास्थ्य रखती है और कम ही बीमार होती है। लड़कियाँ तेज़ी से बढ़ती हैं, और लड़कों की तुलना में जल्दी ही वयस्क अवस्था में पहुँचती हैं।

महिलाओं में कुछ स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याएं अधिक प्रचलित तथा सामान्‍य हैं। नियमित रूप से अपने पारिवारिक डॉक्‍टर के पास जाने से इस प्रकार के रोग या बिमारी से बचा जा सकता है। महिलाओं में देखी जाने वाली कुछेक सबसे आम स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी भ्रांतियां इस प्रकार हैं:-

स्‍तन कैंसर | Breast Cancer

  • स्‍तन कैंसर वह स्‍थिति है जहां स्‍तन की कोशिकाएं कैंसारात्‍मक हो जाती हैं। यह महिलाओं में पाया जाने वाला सबसे सामान्‍य कैंसर है।
  • अनेक अनुसंधानों के पश्‍चात, विश्‍व भर में स्‍तन कैंसर से बचाव दर में वृद्धि आई है। प्रारंभिक स्‍तर स्‍तन कैंसार की पहचान करने में मेमोग्राम सफल है जो इसके इलाज को कम कठोर पद्धति से कर पाने को सरल बनाती है।
  • हालांकि यह पुरूष तथा महिलाओं दोनों में हो सकता है, महिलाओं की शारीरिक बनावट के कारण उनमें इसके होने की अधिक सम्‍भावना रहती है।
  • हल ही में हुई रिसर्च से पता चला है , कि कैंसर का सबसे आम रूप है स्‍तन कैंसर। हर 1 लाख में से  25 .8 महिलाएं इसका शिकार होती है। इसकी मृत्यु 1 लाख 12 .7 एक गंभीर चिता का विषय है।\

ग्रीवा कैंसर

  • ग्रीवा कैंसर गर्भाशय ग्रीवा में होता है जो गर्भाशय का निचला भाग है। ग्रीवा कैंसर के होने में यौन गतिविधियों के दौरान संक्रमित ह्यूमन पैपीलोम वायरस (एचपीवी) के उपमेदों की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है।
  • यदि लक्षण मौजूद हों, तो अपने डॉक्‍टर से अवश्‍य भेंट करें जो कुछ जांच करेंगे जिससे यह पता चलेगा कि कैंसरात्‍मक कोशिकाएं उपस्‍थित हैं अथवा नहीं। समय पूर्व पहचान से जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है।
  • महिलाएं स्‍वास्‍थ्‍य जांच तथा स्‍क्रीनिंग परीक्षण अवश्‍य करवांए तथा ग्रीवा कैंसर के लिए 21 वर्ष की आयु के बाद से एचपीवी टीका भी लें।

गर्भाशय कैंसर 

  • गर्भाशय कैंसर वह कैंसर है जो गर्भाशय में होता है। यह कैंसर केवल महिलाओं में ही पाया जाता है।
  • जितनी जल्‍दी इस कैंसर का पता चल जाता है इससे ठीक होने की संभावना उतनी ही अधिक हो जाती है। तथापि, गर्भाशय कैंसर का पेड़ु तथा पेट के निचले हिस्‍से तक फैलने तक पता नहीं चल पाता है।
  • यदि इनमें से कोई भी संकेत या लक्षण हो या उनके परिवार में गर्भाशय/स्‍तन कैंसर का इतिहास रहा हो तो उसे अपने डॉक्‍टर से तुरंत मिलना चाहिए।

रक्‍ताल्‍पता | Anemia

  • रक्‍ताल्‍पता वह स्‍थिति है जब शरीर में कोशिकाओं तक ऑक्‍सीजन पहुंचाने के लिए आवश्‍यक लाल रक्‍त कोशिकाओं की पर्याप्‍त मात्रा नहीं होती है। लाल रक्‍त कोशिकाओं में कमी, रक्‍त प्रवाह के कारण क्षति या जब शरीर पर्याप्‍त लाल रक्‍त कोशिका उत्‍पन्‍न नहीं करता हो या उसे नष्‍ट करने से होती है।
  • लाल रक्‍त कोशिकाएं आवश्‍यक होती हैं क्‍योंकि उनमें हिमोग्‍लोबिन होता है जो फेफड़ों से ऑक्‍सीजन को पूरे शरीर तक पहुंचानेमें समर्थ बनाती है।
  • रक्‍ताल्‍पता ऑयरन की कमी, विटामिन की कमी, पुरानी बिमारी जो लाल रक्‍त कोशिकाओं के उत्‍पदन में बाधक हो, बोन मैरो बिमारी इत्‍यादि के कारण हो सकती है। यदि इसका ईलाज न किया जाए तो रक्‍तल्‍पता से भारी थकावट, गर्भधारण में समस्‍या, हृदयजनित समस्‍याएं और मृत्‍यु तक हो सकती है।
  • चूंकि रक्‍ताल्‍पता विभिन्‍न प्रकार तथा रूपों में मौजूद होता है, उपचार प्रक्रिया प्रत्‍येक के लिए अलग होगा। आपको किस प्रकार की रक्‍ताल्‍पता है यह आपके डॉक्‍टर द्वारा ही पता लगाया जाएगा और तदनुसार उपचार किया जाएगा ।

कुपोषण | Malnutrition

  • यदि किसी व्‍यक्‍ति को अपने आहार और भोजन से पर्याप्‍त मात्रा में पोषण प्राप्‍त नहीं होता है तो वह कुपोषण का शिकार हो सकता है। आहार में पोषण तत्‍वों की कमी, विटामिन की कमी, असंतुलित आहार तथा कुछ चिकित्‍सा संबंधी समस्‍याओं के कारण कुपोषण हो सकता है।
  • वयस्‍कों में कुपोषण कमजोर रोग प्रतिरोधक तंत्र, संक्रमण का अधिक भय, घाव भरने की क्षमता में कमी, मांसपोशियों की कमजोरी में वृद्धि इत्‍यादि नजर आता है। कुपोषण से भूख की कमी हो सकती है जो स्‍थिति को और अधिक दयनीय बना सकती है। कुपोषण कुछ स्‍थितियों जैसे कि दस्‍त, लीवर की बीमारियां, कैंसर के कारण हो सकता है। जो भूख में कमी उत्‍पन्‍न करते हैं, पागलपन, मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य स्‍थिति, भोजन पचाने में असमर्थता इत्‍यादि से भी इसे बढ़ावा मिलता है।
  • कुपोषण सामाजिक घटक जैसे अकेले रहना, सामाजिक अलगाव, पोषण ग्रहण के बारे अपर्याप्‍त जानकारी, शराब या ड्रग लेना या कम आय होना और गरीबी के कारण भी हो सकता है।

यौन संक्रमण | Sexually Transmitted Disease

  • यौन संक्रमण/रोग सामान्‍यतया यौन क्रिया द्वारा ही संचारित या अधिग्रहित होता है। तथापि, कुछ मामलों में, यह संक्रमण माता से बच्‍चे को गर्भावस्‍था के दौरान, रक्‍त आधान या सुईयों के पुन: प्रयोग से भी फैलता है।
  • असुरक्षित यौन संबंध, एस्‍टीआई का इतिहास होना, यौन उत्‍पीड़न, गंदी सुईयों के माध्‍यम से नशीला द्रव्‍य लेना एसटीआई होने की संभावना को बढ़ाने वाले कुछ घटक हैं।
  • एसटीआई के कुछ लक्षणों में जननांगों के आस-पास गांठ और सूजन, पेशाब के दौरान दर्द/जलन, प्रवाह तथा यौन कार्यकलापों के दौरान असहज/दर्द होना, अकारण योनी रक्‍तस्राव, निचले पेट में दर्द, हाथों और पैरों में लाल चकत्ते या बुखार शामिल है।
  • यदि इसका ईलाज नहीं किया गया तो, एसटीआई अनेक उलझन उत्‍पन्‍न कर सकता है जैसे कि गर्भधारण समस्‍याएं, बांझपन, हृदय रोग, एचपीवी संबंधित रेक्‍टस या सर्वाइकल कैंसर, गठिया इत्‍यादि ।

निष्कर्ष 

 अतः  उपरोक्त सभी बातों के आधार पर हम यह कह सकते है , कि युवा अवस्था में प्रवेश के साथ-साथ महिलाएँ हर महीना मासिक धर्म के चरण से गुज़रती हैं। दरअसल एक वयस्क महिला गर्भ-धारण करने के लिए प्राकृतिक रूप से तैयार होती है। यदि उसका किसी पुरुष से संभोग होता है तो संभव है कि अंडाशय में अ+ण्डाणु प्रसव के लिए तैयार हो और उसी से नवजात जन्म ले। यदि प्रसव की प्रक्रिया आरंभ नहीं होती है, तो सम्भव है कि महिला मासिक धर्म से गुज़रे जिसे कुछ विशेषज्ञ गर्भाशय का विलाप करना कहते हैं। मासिक धर्म में महिलाएँ नाराज़गी-जैसे स्वभाव को प्रदर्शित करती हैं। ऐसे समय में उनके भोजन की कुछ विशेष आवश्यकताएँ हो सकती हैं। कई महिलाएँ अनियमित मासिक धर्म की भी शिकार होती हैं, जिससे उनके गर्भ धारण करने में समस्याएँ आती हैं। मासिक धर्म में जारी रक्त के कारण महिलाओं के शरीर में लोहे की कमी हो सकती है, इस कारण से उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। 

About the author

Amisha Bharti

मैं अमीषा पेशन से एक हेल्थ ब्लॉगर हु. मैं अपने ब्लॉग में लोगों को बीमारियों से मुक्ति दिलाने के तरीकों के बारे में बताती हूँ. आप मेरे ब्लॉग से हेल्थ से संबधित सभी तरह की जानकारी पा सकते है.

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