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कमज़ोर बच्चो के वजन बढाने के लिए डाइट चार्ट

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Written by Surbhi

छोटे बच्चे खाने-पाने के मामले में बहुत चूज़ी होते है, ऐसे में  उनके पैरेंट्स की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है ताकि बच्चों को संपूर्ण पोषण मिले।  बच्चों की डाइट ऐसी हो ताकि उन्हें रोज विटामिन्स, मिनरल्स, फैट और प्रोटीन का सही मात्रा में मिले।  यह उनके शारीरिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। अगर बच्चों को नियमित रूप से पर्याप्त पोषण मिले तो उनका वजन संतुलित रहता है। फोकस केवल इस बात पर नही होना चाहिए कि बच्चा ज्यादा से ज्यादा खाए बल्कि इस बात पर होना चाहिए की अच्छा से अच्छा खाए। डाइट ऐसी हो जिससे भूख मरने की बजाय भूख बढ़ जाए। तो आइए आपको बताते है ऐसे ही कुछ खाद्य पदार्थ जिन्हें बच्चों की डाइट में सम्मिलित कर आप बच्चों को तन्दरुस्त बना सकते है।

  • घी या मक्खन – घी और मक्खन फैट से भरपूर खाद्य है, घी या मक्खन में कभी परांठे या सब्जी को छोंक ना लगाए बल्कि बनी हुई गर्म सब्जी और रोटी पर ऊपर से घी लगाए। घी अगर गाय का हो तो सोने पे सुहागा दाल- दालें प्रोटीन का सबसे बड़ा सोर्स है, अगर बच्चा बहुत ही छोटा है तो उसे दाल का पानी दे।  में भी पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। 
  • मलाई वाला दूध – मलाई वाले दूध से अर्थ है कि यदि आप टोंड  या डबल टोंड दूध ले रहे है तो बच्चों के लिए फुल क्रीम दूध ले। क्योंकि बढ़ती हुए बच्चों के लिए यही जरूरी है, यदि बच्चा दूध पीने से बचता है तो उसे फ्लेवर्ड मिल्क दे लेकिन ध्यान रहे हो सके तो घर पर ही  फ्लेवर्ड मिल्क बनाए या मार्किट से लेने पर उसके इंग्रीडिएंट अच्छे से देखे। 
  • केला – केला एनर्जी का बेहतरीन सोर्स है, इसमे पोटेशियम होता है। छोटे बच्चे को केला मैश करके दे सकते है, बड़े बच्चे को बनाना शेक बनाकर देंगे तो और भी बेहतर रहेगा
  • शकरकंद – शकरकंद फाइबर ,पोटेशियम, विटामिन ए, बी और सी से भरपूर होता है, जो बच्चों के वजन को बढ़ाने में काफी मदद करता है। कमजोर बच्चों को इसका हलवा या फिर उबाल कर दूध में मिलाकर खिलाया जा सकता है।
  • आलू – आलू में कार्बोहाईड्रेट पाया जाता है जो एनर्जी के लिए बहुत जरूरी है, इसे उबालकर, मैश करके या हलवे के रूप में दिया जा सकता है।
  • अंडे – में प्रोटीन काफी मात्रा में पाया जाता है, लेकिन ध्यान रहे 8 महीने की उम्र तक बच्चे को केवल अंडे का पीला भाग यानी पीली जर्दी दे। उसके बाद पूरा अंडा दिया जा सकता है, अंडे को उबालकर, आमलेट के रूप में या भुर्जी के रूप में दिया जा सकता है।
  • हरी सब्जियां – हरी सब्जियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। इससे डाइजेशन बहुत अच्छा रहता है, हरी सब्जियों को सूप के रूप में, परांठो में भरकर, दिया जा सकता है।
  • नट्स – सभी प्रकार के ड्राई फ्रूट्स और विशेषकर नट्स विटामिन से भरपूर होते हैं। इनका पाउडर बनाकर बच्चों को दूध में मिलाकर पिलाया जा सकता है। 
  • फुल क्रीम दही – दही डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए एक बहुत ही अच्छा प्रोबियोटिक है, बाजार की जमी जमाई दही ना लेकर घर पर  दही जमाए तो ज्यादा बेहतर है। श्रीखंड, दही की एक बढ़िया रेसिपी / डिश है जो की शिशुओं और बच्चों को दी जा सकती है।
  • चीज़ / पनीर – पनीर कैल्सियम का एक अच्छा स्त्रोत है, पनीर से बनने वाली डिश अनगिनत है और बच्चे शौक से पनीर खाते है। पनीर घर का बना हो तो और भी अच्छा रहता है।
  • रागी – घी और गुड़ के साथ रागी का प्रयोग बच्चों का वजन बढ़ाने में मदद करता है, इसके अलावा रागी से बनी बहुत सी रेसिपी आप ऑनलाइन देख सकते है। 

इसके अलावा अन्य खाद्य पदार्थ जो बच्चों के कमजोरी दूर कर उन्हें हष्ट पुष्ट बनाने में मदद कर सकते है वो है पीनट बटर, तरबूज के बीज, मूंगफली, बींस, पालक, मशरूम, चिकन, मछली, पास्ता, ब्राउन राइस, ओटमील आदि। इन सबके साथ फलों व सब्जियों का सेवन भी जरूर करें।

निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए: 

  • छह महीने के बाद ही बच्चों को मां के दूध के अलावा कुछ देना चाहिए। 
  • छह माह के बाद अन्य भोजन देने से पहले डॉक्टर से अवश्य राय लेनी चाहिए। 
  • छोटे बच्चों को थोड़ा-थोड़ा करके कम से कम दिन में छह बार खाना खिलाना चाहिए। 
  • बच्चों को जबरदस्ती खिलाने से बचना चाहिए। 
  • डालडा या अन्य वनस्पति तेल को बच्चों के आहार में शामिल नहीं करना चाहिए। 
  • बच्चों को खिचड़ी, दूध-बिस्कुट, मैशड चावल, सब्जियां आदि भी देना चाहिए।
  • रात को दूध में अश्वगंधा एक या आधा चम्मच मिलाकर दे..हल्दी छोंक कर भी दे सकते हैं, दोनों में से एक देना है।
  •  क्वांटिटी बच्चे की उम्र के अनुसार एडजस्ट कर ले। 

बच्चे को हफ्ते में 4 से 5 दिन आँवला जरूर दे,आंवला कैंडी के रूप में दे सकते है।  मेवे जैसेअखरोट, बादाम, किशमिश(काली,हरी)डेट्स, मखाने, भुना चना, गुड़, विंटर में किशमिश, बादाम अखरोट, को धोकर दे,भिगोकर नही..धोना जरूरी है डस्ट हटाने के लिए, छोटे बच्चे को पीसकर दे। मखाने भूनकर रख ले। 

नाभि पर पर मस्टर्ड आयल लगाए,नाक पर गाय का घी। ये सब करने पर आपका बच्चा अंदर से हेल्थी रहेगा।

About the author

Surbhi

मेरा नाम सुरभि है और ब्लोगिंग मेरा पेशन है. में अपने ब्लॉग पर आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों के बारे में बताती हु. आप सभी जानते है की आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खे हमारे लिए कितना फायदेमंद है और इनका किसी तरह का साइड इफ़ेक्ट नहीं है. इसलिए में अपने ब्लॉग पर आपको आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों के बारे में बताउंगी ताकि आप इन्हें अच्छे से जान सके और बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के खुद में बदलाव ला सके.

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