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ब्लीडिंग और स्पॉटिंग है अलग

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Written by Amisha Bharti

अचानक एक दिन आप महसूस करती है कि आप के अंतवस्त्र पर खून के धब्बे है। आप सोचने पर मजबूर हो जाती है क्योंकि अभी आपकी माहवारी में करीब डेढ़ से दो हफ्ते शेष है। इस बात को अनदेखा करना उचित नही, और यदि आप गर्भवती है तब इस तरह खून के धब्बे दिखना कुछ परिस्थितियों में खतरनाक हो सकता है।

स्पॉटिंग क्या होती है? | What is Spotting in Hindi?

स्पॉटिंग बहुत ही आम है, यह मासिकधर्म के आसपास या किसी चोट अथवा इन्फेक्शन के कारण हो सकती है। इसमे रक्त की कुछ बूंदे दिखाई देती है, यदि रक्तस्राव ज्यादा हो या रक्त का रंग बहुत लाल हो तो ये चिंता का विषय है।

स्पॉटिंग के कारण | Reasons of Spotting in Hindi

  • गर्भनिरोधक तरीको के कारण
    गर्भधारण से बचने के लिए इंट्रायूटेराइन डिवाइस का  उपयोग या किसी भी तरह के इम्प्लांट के प्रयोग से भी स्पॉटिंग हो सकती है। इसके अलावा यदि आप गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करती हैं तो उससे भी स्पॉटिंग हो सकती है।
  • ओवुलेशन के कारण
    जब फर्टिलाइजेशन के लिए महिला की ओवरी से एग निकलता है तब भी स्पॉटिंग हो सकती हैं। या फिर एस्ट्रोजन हॉर्मोन की मात्रा में बढ़ोत्तरी भी इसका कारण हो सकती है।
  • मासिकधर्म के समय जब एग रिलीज़ होने वाला होता है तब भूरे या हल्के गुलाबी रंग का रक्तस्राव होता है जो एक दिन में बंद हो जाता है।
  • इन्फेक्शन
    कभी कभी किसी इन्फेक्शन के कारण भी स्पॉटिंग हो सकती हैं। ये इन्फेक्शन वेजिनल इन्फेक्शन के अलावा यूट्रस, सर्विक्स,फेलोपियन ट्यूब में भी हो सकता है।
  • गम्भीर बीमारी में
    कुछ गम्भीर बीमारियों जैसे सर्वाइकल कैंसर, एंडोमैट्रीओसिस, या बच्चेदानी की दीवार में घाव से भी स्पॉटिंग हो सकती है।
  • पोलिसिस्टिक ओवेरियन डिजीज या पोलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम जिसमे पुरुष हॉर्मोन की मात्रा बढ़ जाती है, स्पॉटिंग का एक कारक है।
  • सर्विक्स पर सर्वाइकल पोलिप होने से भी रक्तस्राव हो सकता है।बैक्टीरियल वेजिनोसिस भी एक कारक है।
  • जबर्दस्ती सम्बन्ध बनाने अर्थात यौन उत्पीड़न भी एक कारण हो सकता है।
  • मेनोपॉज़ अर्थात रजोनिवर्ती के समय भी बीच बीच मे स्पॉटिंग होती है, यदी मेनोपॉज़  के बाद ब्लीडिंग हो तो डॉक्टर को जरूर दिखाए

प्रेग्नेंसी में स्पॉटिंग | Spotting during Pregnancy in Hindi

गर्भावस्था में दो चार बूंद स्पॉटिंग सामान्य मानी जाती है, यदि ये बढ़ जाये तो खतरे का विषय है।यदि शुरू के दो महीनों में स्पॉटिंग दिखाई दे तो डॉक्टर से बात करके तुरन्त टेस्ट कराए। 20 से 30% महिलाओं को पहली तिमाही में हल्के या गहरे भूरे रंग के चक्कते दिखाई देते है। यदि यह बढ़ जाती है तो गर्भपात, संक्रमण, या गर्भनाल या प्लेसेंटा में नुकसान होने का संकेत देती है।गर्भावस्था के अंतिम समय पर भी थोड़ी बहुत स्पॉटिंग हो तो प्रसव के नजदीक आने संकेत हैं क्योंकि म्यूकस प्लग निकलता है। गर्भावस्था में ब्लीडिंग होना लापरवाही का संकेत है, जैसे भारी वजन उठाना, गलत एक्सरसाइज करना, लम्बी यात्रा करना, चोट लगना या गलत खानपान।

स्पॉटिंग के लक्षण | Symptoms of Spotting in Hindi

  • जब स्पॉटिंग और मासिक धर्म एक साथ होते है तो सामान्य से अधिक रक्तस्राव होता है।
  • पेशाब या सेक्स के दौरान जलन या दर्द
  • पेट या पेट के निचले हिस्से में दर्द
  • स्पॉटिंग के साथ असामान्य द्रव का निकलना वो भी गन्ध के साथ
  • वजन बढ़ना
  • जी खराब होना
  • अनियमित मासिकधर्म
  • योनि में खुजली होना

मासिकधर्म और स्पॉटिंग में अंतर | Difference btw Menstrual Bleeding and Spotting in Hindi

मासिकधर्म-और-स्पॉटिंग-में-अंतर
  1. मात्रा- मासिकधर्म में होने वाली ब्लीडिंग की मात्रा ज्यादा होती है जिसके लिए पैड की आवश्यकता होती है, जबकि स्पॉटिंग में केवल रक्त के कुछ धब्बे अंतः वस्त्र पर दिखाई देते है।
  2. रंग- मासिकधर्म में होने वाले स्त्राव का रंग लाल होता है जबकि स्पॉटिंग में हल्के  भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते है।
  3. समय- मासिकधर्म का एक निश्चित समय होता है जबकि स्पॉटिंग कभी भी हो सकती है।
  4. संकेत- स्पॉटिंग वैसे तो सामान्य बात है पर कभी कभी किसी गम्भीर बीमारी का लक्षण हो सकती है। जबकि  नियमिय मासिकधर्म महिला के स्वस्थ्य होने का संकेत देता है।

About the author

Amisha Bharti

मैं अमीषा पेशन से एक हेल्थ ब्लॉगर हु. मैं अपने ब्लॉग में लोगों को बीमारियों से मुक्ति दिलाने के तरीकों के बारे में बताती हूँ. आप मेरे ब्लॉग से हेल्थ से संबधित सभी तरह की जानकारी पा सकते है.

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