Children Health Health and Diseases

बच्चों में Down Syndrome Kaise Hota Hai? डाउन सिंड्रोम होने के कारण, लक्षण और इलाज!

down-syndrome-in-children-in-hindi
Written by Amisha Bharti

डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक रोग है, जिसमे पैदा होने वाले बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास पूर्ण रूप से नही होता । सामान्यतः शिशु को अपने माता पिता से 46 क्रोमोसोम मिलते है जिसमे से 23 माता के और 23 पिता के होते है। लेकिन डाउन सिंड्रोम वाले शिशु में एक क्रोमोसोम ज्यादा होता है, डाउन सिंड्रोम के लक्षण हल्के से लेकर गम्भीर तक हो सकते है। ऐसे शिशु का जन्म किसी भी महिला से हो सकता है पर ज्यादा उम्र में माँ बनने वाली महिलाओं में डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे के पैदा होने की सम्भावना ज्यादा होती है। 30 वर्ष की महिलायों में डाउन सिंड्रोम वाले बालक की संभावना 900 में से 1, 35 वर्ष की महिलाओं में ये 350 में से एक और 40 वर्ष की महिलाओं में ये 100 में से एक होती है।

डाउन सिंड्रोम के कारण- Causes of Down Syndrome in Hindi

इसका कोई फिजिकल या एनवायरमेंटल कारण ज्ञात नही है। डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे को सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जीवन भर एक नियमित स्क्रीनिंग में रखना पड़ता है।

डाउन सिंड्रोम के प्रकार- Types of Down Syndrome in Hindi

1. ट्रीसोमी 21

ये सबसे सामान्य प्रकार होता है इसमें क्रोमोसोम की संख्या 46 की जगह 47 होती है।

2. ट्रांसलोकेशन

4%केसेस में 21 क्रोमोसोम सेल डिवीज़न के समय टूट कर दूसरे क्रोमोसोम(टिपीकली क्रोमोसोम 14) से जुड़ जाता है, इसमे संख्या तो 46 ही रहती है पर 21 क्रोमोसोम का एक्स्ट्रा पार्ट डाउन सिंड्रोम के लक्षण पैदा करता है।

3. मोसैकिस्म

इसमे 21 क्रोमोसोम किसी सेल में होता है किसी मे नही, सेल का एक मिक्सचर बनता है जिसमे कुछ 46 और कुछ 47 क्रोमोसोम रखती है।

डाउन सिंड्रोम के लक्षण- Symptoms of Down Syndrome in Hindi

डाउन सिंड्रोम में हमेशा शारीरिक और मानसिक विकलांगता होती है, व्यस्को की बौद्धिक क्षमता 8 से 9 साल के जैसे होती है।

डाउन सिंड्रोम के भौतिक लक्षण

डाउन सिंड्रोम वाले लोगो मे इनमें से कुछ या सभी विशेषताए हो सकती है। एक छोटी सी ठोड़ी, तिरछी आँखे, मांसपेशियों की खराब टोन, हथेली की एक क्रीज़, छोटे मुँह के अपेक्षाकृत बड़ी जीभ चपटी नाक और छोटा मुँह नींद अवरोधक(एपिनिया ) का कारण बनता है एक फ्लैट और छोटा चेहरा, छोटी गर्दन, लचीलापन, पैर की बड़ी उंगली और छोटी उंगली के बीच अतिरिक्त जगह, उंगलियों पर असामान्य पैटर्न, लम्बाई कम बढ़ती है, पुरुषों में औसतन 154सेमी और महिलाओं में 142 सेमी होती है।

 डाउन सिंड्रोम के न्यूरोलॉजिकल लक्षण

  • डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्तियो में हल्की आई क्यू (50-69) मध्यम(30- 59) बौद्धिक विकलांगता होती है। किसी किसी मामले में ये गम्भीर(आई क्यू 20-39) होती है।
  • मोजेक डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्ति में आई क्यू स्कोर 10-30 अंक अधिक होता है
  • डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्तियो में बोलने की क्षमता से भाषा समझने की क्षमता ज्यादा बेहतर होती है।
  • 10-45% तक मे स्टमेरिंग या तेज बोलने के कारण समझने में कठिनाई होती है,
  • कुछ लोग 30 साल की उम्र के बाद बोलने की क्षमता खो सकते है। वे आमतौर पर सामाजिक होते है।डाउन सिंड्रोम वाले बच्चो में 5-10% में ऑटिज़्म होने के साथ मानसिक बीमारी लगभग 30% में होती है।
  • बच्चे आमतौर पर खुश रहते है, पर शुरुआती वयस्कता में अवसाद और चिंता के लक्षण दिख सकते है। इस सिंड्रोम में बच्चो में 5-10% और व्यस्को में 50% मिर्गी के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। कुछ लोग(15%) जो 40 साल से ज्यादा जीवित रहते है उनमें अल्जाइमर का खतरा बढ़ जाता है। 50 वर्ष तक कि आयु तक पहुँचने वाले लोगो मे 50-70% बीमार रहते है।

डाउन सिंड्रोम के इन्द्रिय(सेंसेस)लक्षण

आधे से ज्यादा लोगो की सुनने और देखने की क्षमता कम होती है। देखने की समस्या 38-80% होती है, 20% में स्ट्रेबिस्मस होता है जिसमें दोनो आँखे एक साथ नही बढ़ती।

जन्म के साथ मोतियाबिंद 15% में, केराटोकोनस( पतला शंकु के आकार का कॉर्निया) और ग्लूकोमा भी आ है। आइरिस के बाहरी हिस्से पर भूरे या सफेद रंग के धब्बे(ब्रश फील्ड स्पॉट) 38 से 85%लोगो मे होते है । 50-90% में सुनने की समस्या पाई जाती है, यह ओटिटिस मीडिया (50-70%) या क्रोनिक कान संक्रमण(40-60%) के कारण होती है।कान का संक्रमण पहले वर्ष में शुरू होता है और युस्टाचियन ट्यूब के खराब फंक्शन के कारण होता है ।

ह्रदय से सम्बंधित लक्षण

  • इस सिंड्रोम वाले व्यक्ति में जन्मजात हृदय रोग दर 40% है।
  • इनमें से 80% में एंट्रीओवेंट्रीकुलर सेप्टल दोष या वेंट्रिकुलर सेप्टल दोष होता है,
  • जिनमे ह्रदय रोग नही होता उनमे भी मिट्रल वाल्व की समस्या आम होती है, धमनियों के सख्त होने का खतरा कम होता है ।

 कैंसर लक्षण

  • टेस्टिकुलर कैंसर और रक्त कैन्सर के अलावा लीम्फोब्लास्टिक ल्यूकीमिया और मेगकार्योब्लास्टिक ल्यूकीमिया का खतरा बढ़ जाता है।
  • डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्ति में रोगाणु कोशिकाओं से व्युत्पन्न कैंसर का खतरा होता है चाहे वो रक्त से सम्बंधित हो या नही। तीव्र लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकीमिया में 1-3% मामले डाउन सिंड्रोम के होते है। यह अक्सर 9 साल से अधिक उम्र में होता है जिनमे वाइट ब्लड सेल की संख्या माइक्रोलीटर में 500000 से अधिक होती है।
  • डाउन सिंड्रोम में फेफड़े, गर्भाशय, स्तन कैंसर का खतरा कम होता है क्योंकि ट्यूमर सप्रेसर जीन की उपस्थिति क्रोमोसोम 21 पर होती है।
  • टेस्टिकुलर रोगाणु कोशिका कैन्सर एक अपवाद है जो इस सिंड्रोम में उच्च दर पर होता है।

 एंडोक्राइन लक्षण

थाइरोइड ग्रंथि की समस्या डाउन सिंड्रोम में 20-50 %, में होती है, इसमे हाइपोथायरायडिज्म आम है।ये समस्या जन्म से खराब थाइरोइड(1%) के कारण या बाद में विकसित हो सकती है जिसमे प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा थाइरोइड पर हमले के कारण ग्रेव्स या ऑटोइम्यून थाइरोइड हो सकता है, टाइप 1 मधुमेह मेलिटिस भी आम है।

 गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण

  • कब्ज की समस्या आम होती है। अन्य में लगातार जन्मजात समस्याओं में ड्यूओडनल एट्रिसिया, पिलोरिक स्टेनोसिस, मेकेल डायविटीकुलम, और अपूर्ण फोर्स शामिल है।
  • गेस्ट्रोसोफिजिअल रिफ्लक्स बीमारी भी आम है।

 दाँत के लक्षण

  • इसमे जिंजिवाइटिस के साथ गम्भीर पिरियडोन्टल बीमारी, नेक्रोटिंग अल्सरेटिव जिंजिवाइटिस और दांतों की कमी के कारण निचले फ्रंट दांत अधिक संवेदनशील होते हैं।
  • इसके अलावा बढ़ी हुई हाइपो टॉनिक जीभ, क्षारीय लार, क्रस्टेड हाइपोटॉनिक होठ, कम दांतो पर जड़े, विकृत दाँत, क्लिफ्ट होंठ शामिल है।

 फर्टिलिटी

पुरुषों में पिता बनने की संभावना नही होती, महिलाओं में 30-50% में प्रजनन क्षमता का अनुमान है, रजोनिवर्ती पहले की उम्र में होती हैं, ।

टेस्ट और अल्ट्रासाउंड- Test and Ultrasound for Down Syndrome

इसमे ब्लड और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट को सयुंक्त रूप से रखा जाता है। यदि ब्लड टेस्ट 15 से 20 हफ्ते में किया जाए तो 75%बच्चो में इस सिंड्रोम को पहचान सकते है।

यदि 10 से 13 हफ्ते की प्रेग्नेंसी में ब्लड टेस्ट अल्ट्रासाउंड एक साथ किया जाए तो 90%बच्चो में सिंड्रोम को पहचान सकते है।

डाइग्नोस्टिक टेस्ट- Diagnosis for Down Syndrome in Hindi

1-कोरियोनिक विलस सैम्पलिंग इसमे C V C सेल्स प्लेसेंटा से लेकर फीटल क्रोमोसोम की स्थिति को एनालाइज करने में प्रयोग किया जाता है।

2-अमिनोसेनेटेसिस इसमे माँ के यूटरस में एक नीडिल इन्सर्ट करके फ़ीटस के चारो तरफ से एमनीओटिक फ्लूइड को लिया जाता है ।

अल्ट्रासाउंड- Ultrasound for Down Syndrome

19 से 20 हफ्ते में अल्ट्रासाउंड स्कैन में जो डिफेक्ट आते है वो है स्पिना बायफीडा, कुछ सीरियस हार्ट डिफेक्ट, कुछ किडनी प्रॉब्लम, लिंब के किसी भी पार्ट की अनुपस्थिति, कुछ केसेस के क्लेफ्ट पैलेट, डायलेटेड ब्रेन वेंट्रिकल, छोटी या अनुपस्थित नाक की हड्डी, गर्दन के पीछे बढ़ी हुई थिकनेस, एब्नार्मल आर्टरी

डाउन सिंड्रोम से बचाव- Precautions to Take

ये एक जेनेटिक बीमारी है, इसका बचाव यही है कि महिलाएं 35 वर्ष से पहले बच्चे को जन्म दे, इसके अलावा प्रेग्नेंसी से पहले औऱ उसके दौरान फोलिक एसिड लेने से डाउन सिंड्रोम की संभावना कम हो जाती है।

डाउन-सिंड्रोम-से-बचाव-Precautions-in-down-syndrome-in-hindi

यदि बच्चे को डाउन सिंड्रोम है तो माता पिता क्या करें?

  • ऐसी स्थिति में परेशान होने की बजाय तस्सली से काम ले, बच्चे की इस अवस्था को लेकर मन मे अपराध बोध की भावना ना पनपने दे, बल्कि इलाज के बारे में समझदारी से निर्णय ले। ऐसे मौके पर तर्कसंगत होना बहुत जरूरी है अच्छे डॉक्टर से सलाह ले, गुमराह करने वाली सलाहों और चमत्कारिक इलाज के झांसे में ना आए।
  • जरूरत से ज्यादा बच्चे की मदद करने की जरूरत नही है, ओवरप्रोटेक्शन बच्चे की मदद की बजाय उसकी स्वाभाविक बढ़त और विकास में बाधा पहुंचाता है।
  • दूसरे बच्चे से अपने बच्चे की तुलना करने की भूल भी ना करे।

डाउन सिंड्रोम इलाज- Treatment in Hindi

डाउन सिंड्रोम में अच्छे डॉक्टर की सलाह से, स्पीच थेरेपी, हियरिंग ऐड्स, पिक्चर्स, ऑब्जेक्ट, म्यूजिक फिजियोथेरेपी के द्वारा बच्चे के जीवन को सुगम बनाया जा सकता है।

मोटिवेशनल घटना- Down syndrome success story in Hindi

23 वर्षीय अदिति शर्मा जन्म से डाउन सिंड्रोम से पीड़ित है, 2 5 की उम्र में दिल के छेद की बीमारी की सर्जरी करा चुकी, लेकिन आज अपनी कमजोरी को मात दे चुकी अदिति नवी मुंबई में भूमि मॉल में अदिति कार्नर नाम से रेस्तरां चलाती है। मास्टर शेफ से खाना बनाने की विधि भी सीखती है।

About the author

Amisha Bharti

मैं अमीषा पेशन से एक हेल्थ ब्लॉगर हु. मैं अपने ब्लॉग में लोगों को बीमारियों से मुक्ति दिलाने के तरीकों के बारे में बताती हूँ. आप मेरे ब्लॉग से हेल्थ से संबधित सभी तरह की जानकारी पा सकते है.

Leave a Comment