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हर्पीज के लक्षण, कारण, इलाज़ दवा व उपचार

अगर आपके शरीर के किसी भाग जैसे जननांगों या त्वचा पर खुजली वाले दर्दनाक घाव या फफोले हो जाए तो उसे सामान्य एलर्जी समझ कर अनदेखा  ना करे। ये हर्पिज इन्फेक्शन हो सकता है।

हर्पीज क्या है?

हर्पीज सिम्पलेक्स वायरस के द्वारा फैलने वाला एक संक्रामक रोग है, जोकि लम्बे समय तक रह सकता है। हर्पीज कितने प्रकार का होता है

हर्पीज दो प्रकार का होता है:

  1. एचएसवी I (HSV I)
  2. एचएसवी II (HSV II)

हर्पीज टाइप-1 (HSV I)

 टूथब्रश, खाने के बर्तन, किस करने आदि के द्वारा फैलने वाले इस प्रकार के हर्पीज में मुँह और होठो को त्वचा के आसपास घाव बन जाते है। कई बार इन घावों से एक प्रक्रार का स्त्राव भी होता है, इन्हें ‘कोल्ड सोर’ भी कहते है।

हर्पीज टाइप-2 (HSV II)

 इसे  जेनिटल हर्पीज़ भी कहते है क्योंकि इसमें संक्रमित होने वाले बॉडी पार्ट है लिंग, योनि या गुदा। इन जेनिटल भागो के आस-पास छाले हो सकते हैं। जब छाले फूटते हैं तो वहां घाव बन जाते हैं। ये छाले कुछ हफ्तों या महीनों के अंतर पर फिर से निकल सकते हैं।  हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस से ग्रसित गर्भवती महिला में यह बीमारी मां के कारण बच्चों को भी हो सकती है।

हर्पीज कैसे फैलता है?

माना जाता है कि इस बीमारी के होने के अंदेशा 40 की उम्र के बाद होता है, खासकर ये संक्रमण ऐसे व्यक्ति को ज्यादा प्रभावित करती है जिसे चिकन पॉक्स रज चुका हो। इसका कारण ये है कि उस व्यक्ति के अंदर वेरिसोला जोस्टर वायरस पहले से ही मौजूद होता है जो कि हर्पीज का भी एक कारण है। हर्पीज का वायरस  संक्रमित व्यक्ति की त्वचा की सतह पर मौजूद होता है, पर ये जरूरी नही कि उस व्यक्ति में प्रत्यक्ष लक्षण दिखाई दे। लेकिन ये  दूसरे व्यक्ति के  मुँह, गुदा या प्राइवेट पार्ट्स के आसपास की नम त्वचा में फैल सकता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के छुए हुए सामान को छूने से नहीं फैलता है।

हर्पीज के क्या कारण होते है? | Causes of Herpes in Hindi

हर्पीज होने के निम्न कारण हो सकते हैं:

  1. बिना कंडोम के वेजिनल या एनल सेक्स करना
  2. जिस व्यक्ति का के मुँह के आसपास की त्वचा  संक्रमित हो उसके साथ ओरल सेक्स करना
  3. संक्रमित व्यक्ति के प्रयोग किए हुए सेक्स टॉयज इस्तेमाल करना
  4. सेक्स के लिए एक से ज्यादा पार्टनर g का होना
  5. बहुत ही कम उम्र या कहे कि नाबालिग अवस्था मे सेक्स करना
  6. प्राइवेट पार्ट में सदैव गीलेपन होने के कारण महिलाओ में ज्यादा पाया जाता है।
  7. अगर महिला डिलीवरी के समय दोनो में से किसी भी प्रकार के संक्रमण से ग्रसित है तो बच्चे के लिए बहुत ही गम्भीर जटिलता का कारण बन सकता है।
  8. स्वच्छता का ध्यान ना रखने से।

हर्पीज के लक्षण | Symptoms of Herpes in Hindi

  • अगर संक्रमण को एक से तीन हफ्ते हुए हो तो  फ्लू से मिलते जुलते लक्षण नज़र आते हैं जैसे बुखार, थकान, लिम्फ नोड्स में सूजन और पीठ में दर्द
  • प्राइवेट पार्ट्स, एनस, हिप्स या जांघों के ऊपरी हिस्से के आस-पास घाव या छाले भी हो सकते हैं, घाव की जगह सेक्स के तरीक़े पर निर्भर करती है।
  • इन घाव या छालो में जलन, खुजली हो सकती है या छूने पर उनमें चुभन हो सकती है।
  • इन दानों में पानी जैसा पदार्थ भरा होता है, ये एक-दो दिन में खुद फूट जाते हैं और छोटे छोटे लाल निशान रह जाते है।
  • मूत्र विसर्जन के समय दर्द का अनुभव होता है, ये दाने दो से चार हफ्तों तक बने रह सकते हैं। जब  दाने पहली बार होते है तो बहुत दर्द होता है, अगर बार बार दाने होते है तो दर्द कम होता जाता है।

ऐसा देखा गया है की तनाव अर्थात स्ट्रेस, माहवारी, सर्दी जुखाम होने पर दाने दोबारा हो जाते है। यदि धीरे धीरे दाने निकलने कम हो गए है तो  इसका अर्थ ये नही की आप संक्रमण मुक्त हो गए है, आपको केअर रखनी ही पड़ेगी। इसमे भूख भी कम लगने लगती है, कभी-कभी ये इन्फेक्शन आँखों में भी फैल सकता है, जिसे हर्पीज़ कैराटाइटिस कहा जाता है। इससे आंखों में दर्द, रिसाव और आंखों में किरकिराहट महसूस होने जैसे लक्षण हो सकते हैं। आगे चलकर हर्पीज बहुत सी जटिलताओं में बदल सकती है जैसे चेहरे पर पानी से भरे लाल दाने होते हैं, जोड़ों में दर्द होता है, हेयर फॉल भी हो सकता है, कम सुनाई देना, नेत्रज्योति पर खराब असर, रीढ़ की हड्डी में सूजन, मस्तिष्क में सूजन, मेनिनजाइटिस

हर्पीज का परीक्षण

इसके परीक्षण के लिए डॉक्टर आपके घावों को चेक करेंगे, रुई के फाहे से, घावों से बहने वाले पानी से पदार्थ को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता है। इसके अलावा डॉक्टर दोनो प्रकार के हर्पीज के एंटीबाडीज के लिए ब्लड टेस्ट भी करवा सकते है अगर कोई घाव ना हो तो। अगर हर्पीज सिम्पलेक्स का टेस्ट पॉजिटिव भी आता है तो जरूरी नही की आपको जेनिटल हर्पीज ही हो।

हर्पीज का इलाज़

हर्पीज के इलाज के डॉक्टर को दिखाने के अलावा घरेलू तरीको से भी इसके लक्षणों में आराम मिलता है

1. घरेलू उपचार

दर्दनिवारक दवाएं लें, जैसे कि एसिटामिनोफेन या इबुप्रोफेन।

  • नमक के पानी से स्नान करें।
  • अफेक्टेड एरिया में पेट्रोलियम जेली लगाए।
  • ज्यादा कसे हुए कपड़े ना पहने।
  • घाव या दानों को बार बार ना छेड़े, ना ही फोड़े क्योंकि इनसे निकलने वाला द्रव जहाँ भी लगेगा संक्रमण फैलाएगा।
  • दानों को छूने के बाद, अच्छी तरह से हाथ धोएं।
  • ठीक होने तक सेक्स न करें।
  • एक कपड़े या तौलिये में लपेट कर बर्फ लगाए, बर्फ को डायरेक्ट त्वचा पर ना लगाए।
  • इन उपायों को अपना सकते है, बेकिंग सोड़ा को पानी में मिलाकर रुई का फाहे से घाव पर लगाए या गुलाबजल में चंदन घिसकर लगाए
  • एलोवेरा जेल का उपयोग करें, एंटीबैक्टीरियल तेल जैसे ऑलिव ऑइल या टी ट्री आयल का उपयोग करें

2. दवाएं

दवाओं से हर्पीज ठीक नही होता केवल लक्षणों में आराम होता है,  डॉक्टर एंटीवायरल दवाई लिखते है।

क्या करें?

ठण्डे पानी से नहाएं, ज्यादातर तरल पदार्थों का सेवन करें, आहार में अंकुरित भोजन का सेवन करे,  खूब पानी पिएं, हरि पत्तेदार सब्जियां खाए,

क्या ना करें

घाव या दानों को बार बार ना छेड़े, ना ही फोड़े क्योंकि इनसे निकलने वाला द्रव जहाँ भी लगेगा संक्रमण फैलाएगा, साथी के प्रति ईमानदार रहे, संक्रमण रहने तक किस व सेक्स ना करे, घाव को गीला ना रहने दे, कसे वस्त्र ना पहने,  ऑयली या मसालेदार भोजन ना करे, गर्मी से बच कर रहे, गर्म तासीर की चीज़ें ना खाएं।

About the author

Amisha Bharti

मैं अमीषा पेशन से एक हेल्थ ब्लॉगर हु. मैं अपने ब्लॉग में लोगों को बीमारियों से मुक्ति दिलाने के तरीकों के बारे में बताती हूँ. आप मेरे ब्लॉग से हेल्थ से संबधित सभी तरह की जानकारी पा सकते है.

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