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लिव इन रिलेशनशिप VS मैरिज

लिव-इन-रिलेशनशिप-V-मैरिज
Written by Shaina Dhamija

बदलते दौर में जिस तरह रिश्तों की परिभाषा बदली है उसके बारे में शायद ही किसी ने अनुमान लगाया होगा। आज के रिश्तों और पुराने रिश्तों को देखे तो आजकल के रिश्ते ज्यादा मजबूत नहीं रहते। पुराने वाले रिश्ते भले ही बिना देखे और बिना समझ के होते थे लेकिन आखिर तक चलते थे और समझ वे शादी के बाद विकसित कर देते थे।

आजकल के रिश्ते थोड़ी सी बात पर टूटने की कगार पर आ जाते थे क्योंकि रिश्तों के मायने ही बदल गए। शादी तो दूर की बात सगाई के बाद भी रिश्ते टूटने लगे है। भरोसे और प्यार की कमी ने रिश्तों में दरारें पैदा कर दी है। ऐसे में लोगों ने रिश्ते को अंजाम देने के लिए नया तरीका निकाला है लिव इन रिलेशनशिप।

लिव इन और शादी में क्या फरक है? | Difference between Live-in and Marriage?

लिव इन रिलेशनशिप के बारे में आप अच्छे से जानते होंगे की इसमें शादी से पहले लड़का और लड़की एक साथ लम्बे समय के लिए रहते है। वे शादीशुदा नहीं होते है लेकिन रहते पति-पत्नी की तरह है। लिव इन रिलेशनशिप शादी से कई मायनों में अलग है। एक-दुसरे के प्रति समझ विकसित करने के लिए लड़का और लड़की शादी से पहले एक साथ रहते है ताकि वे एक-दुसरे को अच्छे से जान सके।

एक तरह से कहे तो यह शादी जैसे पवित्र बंधन का मजाक है और दूसरी तरफ कहे तो आजकल के टूटते रिश्तों की वजह से ऐसा जरुरी भी है। लेकिन सिर्फ साथ रहने से आप पति-पत्नी नहीं हो जाते क्योंकि लिव इन रिलेशनशिप में आपको खुली छुट मिली होती है, खुद को आजादी के साथ जीने की।

अगर आप भी लिव इन रिलेशनशिप और शादी को लेकर असमंजस में है तो आज की इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे की लिव इन रिलेशनशिप और शादी में क्या अंतर है। दोनों के क्या कानून है और दोनों में किन बातों का ध्यान रखा जाता है। आईये जानते है शादी और लिव इन रिलेशनशिप के बीच के अंतर को।

लिव इन रिलेशनशिप VS मैरिज

1। लिव इन रिलेशनशिप और शादी मतलब

लिव इन रिलेशनशिप में महिला और पुरुष बिना शादी किये एक साथ रहते है। आज के समय में महानगरों में यह चलन तेजी से चलने लगा है। आजकल के युवा इस तरह के रिश्ते को लेकर काफी उत्साहित है। ऐसे लोग जो शादी के बंधन से छुटकारा पाना चाहते है वे लिव इन रिलेशनशिप का रास्ता अपनाते है।

जबकि शादी दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो परिवारों का मिलन है। शादी में लड़का और लड़की सामाजिक और पारिवारिक तौर पर अग्नि को साक्षी मानकर पुरे रीती-रिवाजों के साथ एक-दुसरे का हाथ थामते है और साथ जीने-मरने की कसमें खाते है। विवाह की परम्परा भारतीय समाज में प्राचीन काल से चली आ रही है और शादी जैसा पवित्र बंधन के आज के समय में कोई नहीं है।

2। आजादी और बंधन

लिव इन रिलेशनशिप में एक पक्ष की सहमती के बिना रिश्ते को तोड़ा जा सकता है जबकि शादी में ऐसा नहीं हो सकता। शादी में अगर आप अलग होना चाहते है तो आपको पूरी क़ानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा जिसमे 6 माह से भी अधिक समय लगता है।

3। भरोसे की कमी

जिन लोगों को शादी पर भरोसा नहीं होता है वे लोग ही लिव इन रिलेशनशिप में रहते है। इन लोगों के लिए दोनों एक जैसे ही है। कुछ लोग अपनी इच्छा से जीना चाहते है और बस एक साथी की तलाश होती है इसलिए लिव इन रिलेशनशिप में रहते है।

जबकि शादी भरोसे की नींव होती है और उसमे दोनों एक-दुसरे पर भरोसा करते है और पारिवारिक जीवन जीते है जिनमे उनका परिवार और समाज दोनों शामिल होते है। शादी में रहने वाले लोग पूरी तरह से पति और पत्नी की तरह रहते है।

4। कानून

लिव इन रिलेशनशिप में रहने के भी कुछ कानून है जैसे लड़की की उम्र 18 या 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए और लड़के की उम्र 21 या 21 साल से ज्यादा होनी चाहिए। दोनों लम्बे समय तक साथ रहने चाहिए। लड़का लड़की के साथ ज्यादती नहीं कर सकता अन्यथा उस पर क़ानूनी कार्यवाई हो सकती है और अलग होने पर गुजारा भत्ता भी देना पड़ेगा।

जबकि शादी में भी ऐसे ही कुछ कानून है। अगर आप शादी के बाद अलग होना चाहते है तो आपको तलाक की प्रोसेस से गुजरना पड़ेगा जिसमे दोनों के साइन होंगे और 6 माह तक दोनों को साथ रहना पड़ेगा, उसके बाद आप अगर साथ नहीं रहना चाहते है तो अलग हो सकते है। ऐसे में आपको गुजारा भत्ता देने की जरूरत नहीं है।

लेकिन अगर सिर्फ आप अलग होना चाहते है और पत्नी की सहमती नहीं है तो आपको उन्हें गुजारा भत्ता देना पड़ेगा। इसमें भी आप अगर पत्नी के साथ ज्यादती करते है तो आप पर घरेलू हिंसा के तहत मुकदमा चलेगा और आपको जेल भी हो सकती है।

लिव इन रिलेशनशिप में आने वाली समस्याएं

  • लिव इन रिलेशनशिप में में लड़के और लडकियां दोनों असुरक्षा की भावना से ग्रस्त होते है। दोनों को यह लगता है की पता नहीं दूसरा साथी उन्हें कब छोड़ दे।
  • लिव इन रिलेशनशिप में संबध हमेशा तनाव में रहता है क्योंकि एक-दुसरे को खोने का डर इसमें ज्यादा रहता है। इस रिश्ते में परिवार साथ नहीं होता।
  • लिव इन रिलेशनशिप को समाज ने आज भी पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया है।
  • लिव इन रिलेशनशिप साथ रहने का ऐसा कॉन्ट्रैक्ट है जिसमे दोनों पक्षों द्वारा इसे रोज रिन्यू किया जाता है।

शादी में आने वाली समस्याएं

  • शादी जैसे संबध में खटास आने पर तलाक की नोबत आ सकती है।
  • पति-पत्नी में अनबन से बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
  • दुबारा शादी करना भारतीय समाज में इतना आसान नहीं है।
  • ज्यादातर शादियाँ इसलिए टिकी रहती है क्योंकि वे बच्चों की वजह से अलग रहना नहीं चाहते क्योंकि इसका बच्चों पर गलत असर होता है।

इस तरह आप जान गए होंगे की शादी और लिव इन रिलेशनशिप में क्या अंतर है और दोनों के अंदर क्या समस्याएं है। उम्मीद करता हु की आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी और अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और कमेंट बॉक्स में अपने विचार दे।

About the author

Shaina Dhamija

मेरा नाम शाइना है और में एक रिलेशनशिप ब्लॉगर हूँ. आज कल व्यस्त लाइफ, खराब जीवनशैली और भरोसे की कमी के चलते रिश्तों मैं तकरार आने लगी है. में लोगों के साथ रिलेशनशिप से जुडी जानकारी शेयर करना पसंद है ताकि लोग रिश्तों की अहमियत को समझ सके.

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