Women's Health

हर महिला से जुड़ी 7 स्वास्थय समस्या

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Written by Surbhi

महिलाएं रखें अपने स्वास्थय का ख्याल,
इन बिमारियों का रखें ख़ास ख्याल

पुरुष और महिला दोनों का ही स्वस्थ रहना जरूरी है। महिला स्वास्थ्य पुरुष स्वास्थ्य से कई मामलों में अलग होता है । घर के हालात, महिला की जिम्मेदारियां, आर्थिक स्तिथि महिला स्वास्थ्य पर असर करते है। महिला स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी कई बीमारियाँ है जो सिर्फ महिलाओं को होती है जैसे की प्रेगनेंसी के वक़्त होने वाली मुश्किलें, रजोनिवृत्ति, ऑस्टियोपोरोसिस आदि। कुछ बीमारियाँ पुरुष और महिला को एक जैसी होती है लेकिन इनका महिला स्वास्थ्य पर असर अलग होता है।  ऐसी कुछ बीमारियाँ नीचे दी गई है :

  • पुरुषों के मुकाबले में हार्ट अटैक से महिलाओं की मौत ज्यादा होती है।
  • एंग्जायटी और डिप्रेशन का शिकार ज्यादातर महिलाएँ होती है।
  • सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज का असर महिलाओं पर ज्यादा होता है।
  • ऑस्टिओआर्थरिटिस पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को प्रभावित करती है।
  • महिलाओं को यूरिनरी ट्रैक्ट की मुश्किलें भी ज्यादा होती है।
  • एक अध्ययन के अनुसार महिलाओं में स्ट्रेस लेवल भी ज्यादा होता है।
  • पुरुषों के मुकाबले में स्ट्रोक भी महिलाओं को ज्यादा होता है।

इन सभी कारणों की वजह से महिला स्वास्थय का ख्याल रखना जरूरी है। नीचे दी हुई महिला स्वास्थ्य से जुड़ी हुई बातों का ध्यान हर महिला को रखना चाहिए ताकि उन्हें जिंदगी में ज्यादा मुश्किलें नहीं हो :

  • महिलाओं को नियमित रूप से गयनेकोलॉजिकल टेस्ट करवाने चाहिए।
  • कुछ उम्र के बाद बोन डेंसिटी टेस्ट करवाने चाहिए।
  • स्तन का कैंसर नहीं हो उसका भी टेस्ट करवाना चाहिए।
  • मीनोपॉज के लिए हार्मोनल टेस्टिंग भी करवानी चाहिए।
  • महिलाओं को नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। ऐसा करने से डिप्रेशन और ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा भी कम हो जाता है।
  • प्रेगनेंसी के वक़्त पोषण से भरा हुआ भोजन खाना चाहिए। ऐसा करने से गर्भावस्था के वक़्त होने वाली मुश्किलों का खतरा कम हो जाता है।
  • महिलाओं को शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।  धूम्रपान भी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से हृदय से सम्भंदित बिमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।

महिला स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ

ऐसी बहुत सारी बीमारियाँ है जो सिर्फ महिलाओं को होती है। इन बीमारियों का महिला स्वास्थय पर बहुत असर पड़ता है। अब जानते है ऐसी महिला स्वास्थ्य से जुड़ी 7 गंभीर समस्याएँ :

दिल से जुड़ी बीमारी

ज्यादातर महिलाओं  की मौत हार्ट अटैक से होती है।  हार्ट अटैक पुरुषों को भी होता है लेकिन महिलाओं में ज्यादा होता है। गर्दन या कंधे में दर्द होना , पाचन में मुश्किलें आना , थोड़े समय में सांस बढ़ जाना,  बहुत बार उलटी करने का मन करना, बिना वजह थकान होना  यह सब महिलाओं में हार्ट अटैक होने के लक्षण है। महिलाओं में  ज्यादातर डायबिटीज, मोटापा , धूम्रपान , ज्यादा शराब पीना , डिप्रेशन में रहने  की वजह से हार्ट  अटैक होता है।

स्तन का कैंसर

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यह महिलाओं में सबसे  ज्यादा होने वाली बीमारी है। यह कैंसर होता तो स्तन की कोशिका में है लेकिन शरीर के बाकि अंगों में भी फैल सकता है। स्तन के के आकर  और दिखावट में बदलाव आना , स्तन की स्किन रूखी हो जाना आदि स्तन के कैंसर के लक्षण है। स्तन में गांठ हो जाना स्तन कैंसर का सबसे पहला लक्षण होता है।

ओवेरियन और सर्वाइकल का कैंसर

ओवेरियन और सर्वाइकल कैंसर अलग होते है लेकिन काफी लोगों को इनके बीच का अंतर नहीं पता।  सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के नीचले हिस्से में होता है जब की ओवेरियन कैंसर गर्भनली में होता है। दोनों ही कैंसर में सामान्य दर्द होता है। ओवेरियन कैंसर के लक्षण ज्यादा दिखाई नहीं देते लेकिन महिला स्वास्थय के लिए यह कैंसर बहुत हानिकारक है। इस  कैंसर के कुछ लक्षण है जैसे की गर्भाशय में सूजन होना, भोजन ग्रहण करते  वक़्त जल्दी पेट भर जाना, ज्यादा वजन कम होना आदि।

गयनेकोलॉजिकल समस्याएँ

मासिक धर्म के दौरान रक्त का बहना साधारण गतिविधि है। लेकिन इस दौरान ज्यादा रक्त बहाव होना, ज्यादा बाथरूम जाना या कोई और लक्षण किसी दूसरी बीमारी के संकेत भी हो सकते है। योनि की समस्याएँ भी दूसरी बीमारियों का संकेत हो सकती है।  अगर इन समस्याओं  का इलाज नहीं किया गया तो महिला में बांझपन या किडनी फेलियर भी हो सकता है।

महिलाओं-में-गयनेकोलॉजिकल-समस्याएँ

गर्भावस्था के दौरान समस्याएँ

गर्भावस्था से पहले हुई बीमारियां महिला और उसके बच्चे के लिए हानिकारक हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज, अस्थमा, डिप्रेशन जैसी बीमारियां पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ पर बुरा असर कर सकती है। गर्भावस्था के दौरान हो सकता है की माँ के रक्त में लाल रक्त कणिकाय की मात्रा कम हो जाये जिसकी वजह से महिला को एनीमिया नामक बीमारी भी हो सकती है। इसी वक़्त में अगर कोई प्रजनन कोशिका गर्भाशय के बहार इम्प्लांट हो जाती है तो यह महिला स्वास्थय के लिए और हानिकारक हो जाता है।

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ऑटोइम्यून डिजीज

यह बीमारी तब होती है जब शरीर के वो कोशिकाएँ जो बिमारिओं से लड़ती है वो शरीर के स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करती है। यह बीमारी लोगों के बीच बढ़ती जा रही है लेकिन ज्यादातर महिला स्वास्थय पर असर करती है। थकावट, हल्का भुखार, दर्द, स्किन पर जलन, वर्टिगो आदि ऑटोइम्यून डिजीज के लक्षण है। शरीर का ऑटोइम्यून सिस्टम का बढ़ा भाग पेट में होता है इसीलिए जिन महिलाओं को यह बीमारी है उन्हें कम चीनी, कम फैट वाला भोजन खाना चाहिए, स्ट्रेस कम लेना चाहिए और शरीर में टोक्सिन की मात्रा कम रखनी चाहिए।

ऑस्टियोपोरोसिस

यह बीमारी हड्डियों को कमज़ोर कर देती है जिसकी वजह से वो जल्दी टूट जाती है। महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस होने के कई कारण है जैसे की बढ़ती हुई उम्र, शराब का सेवन, व्यायाम नहीं करना, धूम्रपान करना आदि। एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड डायग्नोस्टिक की मदद से इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है। इस बीमारी का कोई पक्का इलाज़ तो नहीं है लेकिन डॉक्टर इस बीमारी को बढ़ने से रोक सकते है। इसके लिए डॉक्टर दवाइयाँ या डाइट सप्लीमेंट्स भी देते है।

ध्यान रखें:

इन 7 बिमारिओं के अलावा महिलाओं को डिप्रेशन और एंग्जायटी भी हो सकता है। शरीर में हार्मोनल बदलाव होते रहे है। इन बदलाव के कारण महिलाओं में एंग्जायटी हो सकती है। महिलाओं को आमतौर पर ममेंस्ट्रुअल सिंड्रोम होता है। बच्चे के पैदा होने पर माँ को बेबी ब्लूज नाम का डिप्रेशन होता है। परिमेनोपॉज़ के वजह से भी महिलाओं को डिप्रेशन हो सकता है।

About the author

Surbhi

मेरा नाम सुरभि है और ब्लोगिंग मेरा पेशन है. में अपने ब्लॉग पर आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों के बारे में बताती हु. आप सभी जानते है की आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खे हमारे लिए कितना फायदेमंद है और इनका किसी तरह का साइड इफ़ेक्ट नहीं है. इसलिए में अपने ब्लॉग पर आपको आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों के बारे में बताउंगी ताकि आप इन्हें अच्छे से जान सके और बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के खुद में बदलाव ला सके.

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