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गर्भावस्था में शतावरी के फायदे

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Written by Amisha Bharti

कोई स्त्री माँ बनने वाली हो या बन चुकी हो, उसके लिए शतावरी एक ईश्वरीय वरदान की तरह है। यह चिकित्सीय औषधि एक स्त्री के मातृत्व सफर में आने  वाली सभी मुश्किलों से निकाल लेती है। चरक सहिंता और अष्टांग हृदयम दोनो में स्त्री के लिए शतावरी के गुणों का बखान किया गया  है। आयुर्वेद में शतावरी को जड़ी बूटियों की रानी कहा जाता है।

शतावरी क्या हैं?

शतावरी, शतावर, सतमूल या सतमूली नाम का औषधीय गुण वाला पौधा श्री लंका, भारत तथा हिमालयी क्षेत्र में उगता है, ये कांटे दार लता वाला पौधा एक से दो मीटर लम्बा होता है। इसे शतावरी रेसामोसस भी कहा जाता है।

शतावरी में पाए जाने वाले तत्व और गर्भावस्था में उनके फायदे:

1. फोलिक एसिड

 ये गर्भावस्था में दिया जाने वाला सबसे जरूरी तत्व है।फोलिक एसिड सप्लीमेंट ऑक्सीजन ले जाने वाली रेड ब्लड सेल्स को बढ़ाता है जिससे पूरे शरीर मे ऑक्सीजन प्रचुर मात्रा में जाती है। गर्भवती तथा भ्रूण को सम्पूर्ण पोषण मिलता है और गर्भपात की सम्भावना कम हो जाती है फोलिक एसिड न्यूरल ट्यूब की रक्षा कर  भ्रूण का विकास करता है और शिशु को

  • जन्मजात बीमारियों जैसे स्पिना बिफिडा से बचाता है।

स्पिना बिफिडा में शिशु के रीढ़ की हड्डी के चारो और सुरक्षा परत नही बन पाती और बच्चे को रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानियां होती है। साथ ही फोलिक एसिड की कमी से भ्रूण का दिमागी विकास भी नही होता और अनेंसफली(anencephaly) नामक बीमारी हो सकती है। इस बीमारी वाले बच्चे ज्यादा समय जीवित नही रहते।

फॉलेट की कमी शिशु का वजन भी नही बढ़ने देती। समयपूर्व डिलीवरी का खतरा कम हो जाता है,माँ और बच्चे को एनीमिया नही होता। माँ को दिल की बीमारी,अल्जाइमर और कैंसर जैसी बीमारियों से दूर रखता है। शिशु को कटे तालु और कटी जीभ की परेशानी से दूर रखता है। प्लेसेंटा के विकास में मदद करता है।

2. विटामिन सी

गर्भावस्था में विटामिन सी का सेवन करने से संक्रमण और दूसरी संक्रामक बीमारी होने का खतरा कम हो जाता है। इससे बच्चे का दिमाग भी दुरुस्त रहता है।

3. विटामिन ई

ये विटामिन गर्भावस्था में स्त्री तथा भ्रूण को पॉल्युशन और टॉक्सिन्स से बचाता हैं। नर्वस सिस्टम और इम्युनिटी को बेहतर बनाता है।

4. विटामिन बी 6

ये माँ और भ्रूण दोनो के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। महिला को होने वाली मितली और  मॉर्निंग सिकनेस से बचाता है। ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है

5. कैल्शियम

कैल्शियम  बहुत ही जरूरी  है गर्भावस्था में अगर स्त्री प्रचुर मात्रा में इसका सेवन ना करे तो कोख में पलने वाला भ्रूण विकास के लिए स्त्री की हड्डियों  से इसकी पूर्ति करता है। शतावरी इसका एक बहुत ही उम्दा स्त्रोत है।

6. ग्लुटाथिओंन

 ये प्रेग्नेंट महिला को आवश्यक पोषण देती है, ये एंटीऑक्सीडेंट के रूप में डी एन ए  पर होने वाले हमलों को रोकती हैं। जिससे बर्थ डिफेक्ट नही होता।

7. इनुलिन

शतावरी खाने से शरीर मे भारी मात्रा में इनुलिन  की आपूर्ति होती है। ये एक स्टार्च युक्त पदार्थ हैं जो पेट मे नही पचता ये आंत्र में ही विकसित होता है वही पर गुड बैक्टरिया इसका इस्तेमाल करते हैं। ये बैक्टीरिया बोवेल फंक्शन  को बेहतर करते है।

शतावरी में बहुत बड़ी मात्रा में फाइटो केमिकल पाए जाते हैं। ये केमिकल रोग पैदा करने वाले कारकों से लड़ते है, शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते है।

शतावरी में पाए जाने वाले फाइटो केमिकल ये है:

  • स्टेरॉयडल  सेपोनिन्स जिसे शतावरीन भी कहा जाता है।
  • रूटिन और क्वेरसेटिन इसके फल और फूलों में पाए जाते है।
  • स्टिरोल जैसे सिटोस्टिरोल इसकी जड़ो में मिलते है।
  • अल्कालाइड्स, म्यूसिलेज, ओलिगोसेकेराइड,  आइसोफ्लेवोन्स
  • विभिन्न प्रकार के मिनरल्स जैसे कॉपर, जिंक, पोटेशियम, मैग्नीशियम, सेलेनियम उपलब्ध होते हैं।

शतावरी के गलत प्रभाव

  • गर्भावस्था में शतावरी के प्रयोग से स्तनों के आकार में बदलाव हो सकता है।
  • अप्रत्याशित वजन बढ़ सकता है।
  • किडनी तथा दिल की बीमारी में नुकसान देह हो सकती है।
  • अत्यधिक शतावरी लेने से डायरिया हो सकता है।
  • शतावरी के अधिक सेवन से पेटदर्द हो सकता है।
  • ज्यादा आयुर्वेदिक औषधि के इस्तेमाल से बालों और त्वचा की समस्या हो सकती है।

शतावरी लेने का तरीका

शतावरी का इस्तेमाल कई रूपो में किया जाता है जैसे शतावरी का चूर्ण, शतावरी की गोली या लिक्विड दवाई। ज्यादातर लोग चूर्ण लेना पसंद करते है क्योंकि ये जल्दी पच कर जल्दी असर दिखाता है। शतावरी का चूर्ण स्त्री डिलीवरी होने के बाद भी दूध के साथ ले तो स्त्री के दूध में बढ़ोत्तरी होती है।

  • शतावरी दूध के साथ: एक गिलास दूध ले उसमे एक चम्मच घी एक चम्मच कटा हुआ नारियल ले।
  • एक चम्मच शहद लेकर एक चम्मच शतावरी पाउडर मिलाकर पी ले।
  • इसके अलावा ढाई ग्राम शतावरी चूर्ण तथा ढाई ग्राम मिसरी को मिलाकर गाय के दूध से ले सकते है।
  • शतावरी को गोली के रूप में भी ले सकते है, लेकिन बिना डॉक्टरी परामर्श के बिल्कुल ना ले। डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार ही बताएगा कि कितनी गोली लेनी है, कब लेनी है।

शतावरी के पौधे का इस्तेमाल कैसे करे?

  1. 350 ग्राम शतावरी को अच्छे से धोकर काट ले।
  2. इसके बाद शतावरी पर ऑलिव आयल लगाकर काला नमक और काली मिर्च छिड़क ले।
  3. तवे गर्म करें और इसपर शतावरी सेकने के लिए रख दे।
  4. जब अच्छे से पक जाए तब इसका प्रयोग करे।

About the author

Amisha Bharti

मैं अमीषा पेशन से एक हेल्थ ब्लॉगर हु. मैं अपने ब्लॉग में लोगों को बीमारियों से मुक्ति दिलाने के तरीकों के बारे में बताती हूँ. आप मेरे ब्लॉग से हेल्थ से संबधित सभी तरह की जानकारी पा सकते है.

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