Children Health Health and Diseases

बच्‍चे में उदासी और मूड में बदलाव मानसिक रोग का संकेत है

बच्चों-का-मानसिक-स्वास्थय
Written by Surbhi

बच्चों का मानसिक स्वास्थय
Child Mental Health

बच्चों का मानसिक स्वास्थय भी उतना ही जरूरी है जितना की शारीरिक स्वास्थय। स्वस्थ मानसिक स्तिथि बच्चों को अच्छे से विकसित होने में मदद करती है और जिंदगी में आने वाली हर मुश्किल से लड़ने की हिम्मत देती है। ऐसे बहुत सारी बातें है जो बच्चों की मानसिक स्तिथि पर असर करती है।

 ध्यान दीजिये बच्चों की अच्छी मानसिक स्तिथि के लिए क्या करें :

  • हमेशा बच्चों को समय पर खाना खिलाना चाहिए और व्यायाम करवाना चाहिए।
  • उनको घर के अंदर और बाहर खेलने का समय जरूर देना चाहिए। 
  • बच्चों को पूरेपरिवार का स्नेह मिलना चाहिए।
  • उनको ऐसे स्कूल में भेजना चाहिए जहा ढंग से पढाई होती हो और बच्चे का ध्यान भी रखा जाता हो।
  • बच्चों को हमेशा प्यार भरा वातावरण देना चाहिए।
  • बच्चों में नई चीज़े जानने के लिए और सीखने का उत्साह बढ़ाना चाहिए।
बच्चों-की-अच्छी-मानसिक-स्तिथि-के लिए-क्या-करें

जिन बच्चों के माँ बाप बच्चों को बड़ा करते वक़्त इन सभी बातों का ध्यान रखते है उन बच्चों का मानसिक स्वास्थय सही रहता है।  लेकिन ऐसा हर बच्चे के लिए मुमकिन नहीं हो पाता। बहुत सारे बच्चों को बचपन में ही नफरत, लड़ाई झगडे और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह सब उनके मानसिक स्वास्थय पर असर करते है।  घर का माहौल अगर ठीक नहीं होता तब भी बच्चों की मानसिक स्तिथि पर असर पड़ता है। ऐसे बच्चों को अपनी भावनाओं को संभालना मुश्किल हो जाता है जो बच्चों में मानसिक रोग होने का संकेत है।

वर्ल्ड हेल्थ संगठन के एक अध्ययन के अनुसार पुरे विश्व में 10-20 प्रतिशत बच्चों में मानसिक रोगों के लक्षण देखे जाते है। बच्चों में मानसिक रोगों के संकेत 14-20 साल के आस पास दिखने लग जाते है। कई बार ऐसा भी होता है की जन्म के वक़्त से बच्चों में मानसिक रोगों के लक्षण दीखते है। ऐसा तभी होता है जब माँ बाप में से किसी एक को मानसिक रोग हो।

बच्चों में कई प्रकार के मानसिक रोग हो सकते है जैसे की एंग्जायटी, डिप्रेशन, ओप्पोसिशनल डेफिएंट डिसऑर्डर, कंडक्ट डिसऑर्डर, अपने आप को हानि पहुँचाना आदि। मानसिक रोगों से पीड़ित बच्चों को अगर सही वक़्त पर इलाज नहीं मिल पाता तो उनमे आत्मविश्वास कम होने लगता है और हर रोज़ कोई ना कोई मुश्किल का सामना करना पड़ता है। अगर ऐसे बच्चों को सही इलाज दिया जाए तो इनका मानसिक रोग ठीक हो सकता है और यह बच्चे बेहतर जिंदगी जी सकते है। इसके लिए जरूरी है की जब बच्चों में मानसिक रोगों के संकेत दिखने लगे तब अच्छे डॉक्टर से इलाज करवाना शुरू करें ।

कैसे पहचाने बच्चों में मानसिक रोगों के लक्षण?

कैसे-पहचाने-बच्चों-में-मानसिक-रोगों-के-लक्षण

बच्चों में मानसिक रोग अलग-अलग प्रकार के हो सकते है। हर रोग के लक्षण अलग होते है इसीलिए बच्चों के स्वभाव से आप आसानी से पहचान सकते है की बच्चों में मानसिक रोगों के संकेत है या नहीं। नीचे दिए हुए इन रोगों के बारे में पढ़ कर आप आसानी से पहचान जायेंगे की आपके बच्चे में कोन से मानसिक रोग के लक्षण दिख रहे है :

  • एंग्जायटी

एंग्जायटी की वजह से बच्चों में अलग अलग चीज़ों को लेकर मन में डर पैदा हो जाता है जैसे की स्कूल जाने का डर, लोगों से मिलने का डर आदि । ऐसी हालत में बच्चे चिड़चिड़े हो जाता है और हर छोटी बात पर गुस्सा करने लगते हैं। बच्चों में कई प्रकार के एंग्जायटी डिसऑर्डर हो सकते है जैसे की माता पिता से दूर जाने का डर, अलग अलग जगहों पर जाने का डर, भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने का डर आदि। इस बीमारी के लक्षण है रात में सोने में दिक्कत होना, सर और पेट में दर्द रहना, हर वक़्त थकावट महसूस करना आदि। अगर आपके बच्चे में यह संकेत दिखते है तो इसका मतलब है उसको यह मानसिक रोग है।

  • डिप्रेशन

बहुत सारे बच्चे अक्सर डिप्रेशन का शिकार होते है। डिप्रेशन वो अवस्था है जिसमे बच्चा हर वक़्त उदास और मायूस रहता है। ऐसी हालत में बच्चों को जो काम और चीज़े पसंद होती है वो काम और चीज़े भी पसंद नहीं आती। अगर ऐसा लम्बे समय तक रहता है तो इसका मतलब है की आपके बच्चे को डिप्रेशन है। इस बीमारी के लक्षण है हर वक़्त उदास रहना , बहुत कम भोजन खाना , नींद नहीं आना , अपने आप को हानि पहुँचाना आदि।

  • ओप्पोसिशनल डेफिएंट डिसऑर्डर

इस मानसिक रोग में बच्चे अपने घरवालों की बात मानने से मना  करते है।  वो उनकी कोई बात नहीं सुनते और गुस्सा करने लगते है। इस मानसिक रोग को ही ओप्पोसिशनल डेफिएंट डिसऑर्डर कहते है। यह ज्यादातर 8 साल के बच्चों में होता है। इस मानसिक रोग में बच्चे अपनी हर गलती के लिए दूसरों को दोषी ठहराते है। अगर आपके बच्चे में भी यह सारे लक्षण दिख रहे है तो इसका मतलब है की उसको यह मानसिक रोग है।

  • कंडक्ट डिसऑर्डर

इस मानसिक रोग में बच्चें कोई भी नियम नहीं मानते चाहे वो नियम घर के हो या स्कूल या किसी और जगह के। ऐसी हालत में उनका अपने साथ वालों के साथ रहना मुश्किल हो जाता है। इस दौरान बच्चे बहुत गुस्से में भी रहते है जो उनकी और साथ साथ बाकि लोगों की सेहत के लिए भी हानिकारक हो सकता है। बच्चों में मानसिक रोगों के लक्षण सही से समझने के बाद ही आप तय कर पाएँगे की उसको यह रोग है या नहीं।

  • अटेंशन डेफिसिट / हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर

यह एक न्यूरो डेवलपमेंट डिसऑर्डर है जो ज्यादातर बचपन में होती है। इस मानसिक रोग में बच्चों को पढ़ने में या कोई भी काम करने में ध्यान देने में मुश्किल होती है। ऐसी हालत में बच्चे कोई भी काम करने से पहले बिलकुल सोचते नहीं है की ऐसा करने से क्या परिणाम होगा। इस मानसिक रोग के लक्षण को पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है। जब बच्चा ज़्यदातर दिन में सपने देखने लग जाये या हर चीज़ को भूलने लग जाये या बहुत ज्यादा बात करने लग जाये या छोटी छोटी गलतियां ज्यादा करने लग जाये तो इसका मतलब है की उसको यह मानसिक रोग है।

  • ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर

इस मानसिक रोग में बच्चों को हर वक़्त कोई ना कोई विचार हमेशा परेशान करता रहता है। वो उसी विचार के बारे में सोचते रहते है जब की यह हो सकता है की उस विचार का कोई महत्त्व ही नहीं हो। बच्चों को यह मानसिक रोग तब होता है जब बार बार उन्हें लगे की उनके मन में आ रहे विचार सही है और वो उसके अनुसार ही अपना काम करते है। इन विचारों को ही ओबसेशन कहते है। इस मानसिक रोग में बच्चे के दिमाग में अनचाहे ख्याल , उन से जुड़ी तसवीरें बार-बार आती है जो उन्हें परेशान कर देती है। ऐसी हालत में कई बार बच्चे एक ही काम बार-बार करते है जैसे की बार-बार हाथ धोना या बार-बार चीज़े सही करना।  अगर आपके बच्चे में भी यह लक्षण दिख रहे है तो इसक मतलब है की उसको यह मानसिक रोग है।

  • पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर

कई बार ऐसा होता है की कुछ घटनाएँ बच्चों के मन पर गहरा असर छोड़ देती है। ऐसे में बच्चें इन घटनाओं को भूल नहीं पाते और परेशान हो जाते है। अगर 1 महीने से ज्यादा बच्चे उभर नहीं पाते तो इसका मतलब है की उनको पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर हो गया है। इस मानसिक रोग में बच्चे रात में ठीक से सो नहीं पाते , बार-बार उस घटना को याद करके उदास या परेशान हो जाते है , कभी-कभी हर वक़्त गुस्से में रहते है और नई जगह पर जाने से डरते है। अगर यह सारे लक्षण आपको बच्चे में दिख रहे है तो इसका मतलब है की वो इस रोग से पीड़ित है।

क्या है बच्चों में मानसिक रोगों का संकेत?

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बहुत बार ऐसा होता है की आपके बच्चे का स्वाभाव अचानक  से बदलने लगता है। वो ज्यादा परेशान या चुप-चुप रहने लगता है। यह सब बच्चों में मानसिक रोगों के लक्षण हो सकते है। नीचे दिए हुए कुछ लक्षणों से आप यह जान सकते है की आपके बच्चों को मानसिक रोग है या नहीं :

  1. बच्चो के मनोदशा में बदलाव: अगर लम्बे समय तक आपके बच्चों की मनोदशा में बदलाव रहता है तो यह बच्चों में मानसिक रोगों का संकेत है।
  2. तीव्र भावनाएँ: अगर आपके बच्चे के मन में बिना वजह का डर या चिंता है जिसकी वजह से वो कोई काम अच्छे से नहीं कर रहा है तो हो सकता है की आपके बच्चे को कोई मानसिक रोग है।
  3. व्यव्हार में बदलाव : अगर आपके बच्चों के व्यवाहर में अचानक से बड़े  बदलाव आएँ है तो यह भी आपके बच्चों में मानसिक रोगों का संकेत है।
  4. ध्यान देने में कठिनाई : अगर आपका बच्चा किसी भी काम में बिलकुल ध्यान नहीं दे रहा है जिसकी वजह से उसकी पढाई में भी मुश्किलें हो रही है तो इसका मतलब यह है की वो किसी मानसिक रोग का शिकार है। 
  5. वजन कम होना : एक दम से वजन कम हो जाना , ज्यादा समय तक  भोजन करने का मन नहीं करना, उल्टियां करना यह सब बच्चों में मानसिक रोगों के लक्षण है।
  6. हानि पहुँचाना: अगर आपके बच्चे को कोई भी मानसिक रोग है तो हो सकता है वो खुदको या अपने आस पास के लोगों को हानि पहुंचाने का प्रयत्न करे।

यह सारे लक्षण बच्चों में मानसिक रोगों के संकेत है।

About the author

Surbhi

मेरा नाम सुरभि है और ब्लोगिंग मेरा पेशन है. में अपने ब्लॉग पर आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों के बारे में बताती हु. आप सभी जानते है की आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खे हमारे लिए कितना फायदेमंद है और इनका किसी तरह का साइड इफ़ेक्ट नहीं है. इसलिए में अपने ब्लॉग पर आपको आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों के बारे में बताउंगी ताकि आप इन्हें अच्छे से जान सके और बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के खुद में बदलाव ला सके.

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