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जानिये बच्चो में चिकनगुनिया के लक्षण और उसमें क्या करें?

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Written by Amisha Bharti

चिकनगुनिया एक विषाणुजनित संक्रमण है। इसे बुखार और जोड़ों में तेज दर्द जैसे लक्षणों से पहचाना जाता है। इसका नाम तंजानिया देश की भाषा के एक शब्द से पड़ा है, जिसका अर्थ है “ऐसा जो विकृत हो जाता है या झुक जाता है”। इसका इशारा चिकनगुनिया के मुख्य लक्षण यानि कि झुक कर चलना और जोड़ों में अत्याधिक दर्द की तरफ है। हालांकि, चिकनगुनिया की वजह से मौत होना काफी दुर्लभ है।

चिकनुनिया, संक्रमित मादा टाइगर मच्छर के काटने से फैलता है। यह वही मच्छर है, जो डेंगू भी फैलाता है और इसमें अन्य बीमारियां जैसे कि जीका आदि फैलाने की भी क्षमता है। 

यह मच्छर विशेषत: दिन में काटता है, विशेषकर तड़के सुबह और शाम शुरु होने के समय। यह ठहरे हुए पानी में पनपता है। चिकनगुनिया घनी आबादी वाली क्षेत्रों में तेजी से फैलता है, क्योंकि यहां उनके पनपने के काफी स्थान होते हैं।

बच्चों में चिकनगुनिया के लक्षण | Symptoms of Chikungunya in Children

चिकनगुनिया के लक्षण हमेशा सामने आए, यह जरुरी नहीं, खासकर कि बच्चों में। यदि लक्षण दिखाई भी दें, तो आमतौर पर निम्न लक्षण होते हैं।

  1. तेज बुखार
    चिकनगुनिया के शुरुआती लक्षणों में से एक है तेज बुखार होना. चिकनगुनिया में बुखार 102 डिग्री सेल्सियस से लेकर 104 डिग्री सेल्स‍ियस तक पहुंच जाता है. बुखार हफ्तेभर या दस दिनों तक भी बना रह सकता है।
  2. जोड़ों में तेज दर्द
    जोड़ों में तेज दर्द होना, इस बीमारी का एक प्रमुख लक्षण है। जोड़ों में तेज दर्द होता है, जिसकी वजह से हाथ-पैर का मूवमेंट करने में भी तकलीफ होती है। ये दर्द काफी दिनों तक बना रहता है, कुछ लोगों को जोड़ों में दर्द के साथ ही सूजन की शि‍कायत भी हो जाती है।
  3. गंभीर पीठ दर्द 
    गंभीर पीठ दर्द सिरदर्द थकान के साथ मांसपेशी में दर्द त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते का होना जो आमतौर से 48 घंटों में दिखाई पड़ते हैं।
  4. रैशेज या चकत्ते पड़ जाना
    जरूरी नहीं है कि हर किसी के शरीर पर चकत्ते या रैशेज पड़ें ही लेकिन कुछ बच्चों में  ऐसे लक्षण भी नजर आते हैं। ये चकत्ते चेहरे पर, हथेली पर और जांघों पर नजर आते हैं।
  5. दस्त (डायरिया)
    कभी-कभार पतला मल होना सामान्य है। मगर, यदि आपके शिशु के मलत्याग के तरीके में अचानक बदलाव आता है और वह बार-बार पानी जैसा पतला मलत्याग कर रहा है, जिसमें कोई ढेले नहीं हैं तो हो सकता है शिशु को डायरिया हुआ हो। मल विस्फोटक तरीके से बाहर आसपास छींटे मारता हुआ निकलता है। 
    दस्त के अन्य लक्षणों पर भी ध्यान दें। इनमें शामिल हैं उल्टी, बुखार और कभी-कभार शिशु के मल में खून या श्लेम आना।
  6. कान का संक्रमण
    कुछ मामलों में कान में इनफेक्शन (जो कि वायरल या बैक्टीरियल कुछ भी हो सकता है) दस्त की वजह बन सकता है। यदि आपके शिशु के साथ ऐसा हो, तो आप यह भी पाएंगी कि शिशु चिड़चिड़ा है और अपने कान खींचता रहता है। उसे उल्टी हो सकती है और उसकी भूख कम हो सकती है। हो सकता है उसे हाल ही में सर्दी-जुकाम हुआ हो। उसे बुखार भी हो सकता है।
  7. भोजन से  एलर्जी
    भोजन एलर्जी यानि फूड एलर्जी में ​शरीर की प्रतिरक्षण प्रणाली उन खाद्य प्रोटीनों के प्रति प्रतिक्रिया करती है, जो सामान्य तौर पर कोई नुकसान नहीं पहुंचाते। भोजन एलर्जी होने के हल्के या गंभीर प्रभाव तुरंत या फिर एक-दो घंटों में दिखाई दे सकते हैं। इसके लक्षणों में दस्त, गैस, पेट में दर्द और मल में खून आना शामिल है। कुछ और गंभीर मामलों में एलर्जी से पित्ती (हाइव्स), चकत्ते, सूजन और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।

चिकनगुनिया के उपाय | Remedies for Chikungunya in Hindi

चिकनगुनिया से बचाव के लिए कोई टीका नहीं है। सबसे बड़ा उपाय यही है कि शिशु को मच्छरों के काटने से बचाया जाए।

मच्छर गर्म और आर्द्र मौसम में स्थिर पानी में पनपते हैं। इसलिए सुनिश्चित करें कि आपके घर या आसपास के क्षेत्र में कहीं भी खुले में पानी जमा न हो, खासकर कि बारिश के दिनों में।

  • मच्छरों से बचने के लिए मस्कीटो रिपेलैंट्स, नेट्स, मैट्स और स्प्रे का इस्तेमाल करें।
  • साफ-सफाई रखें, घर के आसपास पानी इकट्ठा न होने दें। घर के आसपास कूड़े का ढेर न लगने दें।
  • रूके हुए पानी में मच्छरों के लार्वा न उत्पन्न होने दें।
  • जब वे खेलना शुरू करते हैं तो बच्चों को लंबे बाजू वाली शर्ट और फुल पैंट पहनाएं।
  • उन्हें हल्के रंग के कपड़े पहनाएं क्योंकि मच्छर ज्यादातर गहरे रंग की ओर आकर्षित होते हैं। 
  • बच्चे को पूरी बांह की कमीज व पूरी लंबाई वाली पैंट या लोअर पहनाएं, ताकि त्वचा ढकी रह सके। साथ ही हल्के फैब्रिक का चयन करें, जिसमें शिशु आराम महसूस करे। 
  • बच्चे को हल्के रंग के कपड़े पहनाएं। गहरे रंग के कपड़े मच्छरों को आकर्षित करते हैं।
  • छोटे बच्चों को मच्छरों काटने का खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि वे दोपहर में भी सोते हैं। इसलिए मच्छर दोपहर में उन्हें आसानी से काट सकते हैं। घर में भी सभी तरह की एहतियात बरतें और जब बच्चा दिन में सो रहा हो तो विशेष ध्यान रखें।
  • सोते हुए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, दिन में सोते समय भी।
  • मच्छरों को घर में प्रवेश करने से रोकने के लिए खिड़कियों पर जाली लगवा लें। बाहर की तरफ के सभी दरवाजों पर आप डोर ब्रश भी लगवा सकते हैं, ताकि मच्छर बाहर ही रहें।
  • उम्र के अनुसार उपयुक्त मच्छर निरोधकों का इस्तेमाल करें।
  • वातानुकूलित या ठंडक वाले कमरे में रहें। मच्छर ठंडक में नहीं पनपते हैं। यदि आप कूलर का इस्तेमाल करते हैं, तो इसे नियमित रूप से साफ करें और पानी बदलें। इसे मच्छरों को पनपने का अवसर नहीं मिलेगा।

निष्कर्ष 

अत: उपरोक्त सभी बातों के आधार पर हम यह कह सकते है , की चिकनगुनिया का  बुखार 2 से 12 दिन तक रहता है, लेकिन रोगी को इससे उबरने के लिए महीनों लग जाते हैं। कई बार चिकनगुनिया के मरीज को जोड़ों के दर्द की समस्या 3 महीने से 2 साल तक झेलनी पड़ती है। शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, निमोनिया, सांस संबंधी बीमारियां आदि चिकनगुनिया के प्रभाव से हो सकती हैं।

About the author

Amisha Bharti

मैं अमीषा पेशन से एक हेल्थ ब्लॉगर हु. मैं अपने ब्लॉग में लोगों को बीमारियों से मुक्ति दिलाने के तरीकों के बारे में बताती हूँ. आप मेरे ब्लॉग से हेल्थ से संबधित सभी तरह की जानकारी पा सकते है.

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