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वेब ब्राउज़र क्या है? Internet Browser की पूरी जानकारी हिंदी मे !

वेब ब्राउज़र (Web Browser)
Written by Varun
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वेब ब्राउज़र (Web Browser)

वेब ब्राउज़र एक प्रकार का सर्च इंजन है। जहां लोग अपने रिजल्ट खोजने के लिए आते हैं और अपने प्रश्नों को सर्च करते हैं। प्रश्नों को सर्च करने के पश्चात उत्तर के तौर पर वेब ब्राउजर बेहतरीन रिजल्ट उपलब्ध कराता है।

इंटरनेट में कई प्रकार के वेब ब्राउज़र उपस्थित है। जैसे यूसी ब्राउजर, क्रोम, ओपेरा मिनी ब्राउजर, मोज़िला फायरफॉक्स इत्यादि। वेब ब्राउज़र क्या है? इसके बारे में अधिकतर लोग जानते होंगे। लेकिन इसका कैसे इस्तेमाल करें और कौन सा वेब ब्राउज़र इस्तेमाल करने में आसान और अच्छा है। इसके बारे में भी जानना जरूरी है। इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए अधिकतर लोग वेब ब्राउज़र का उपयोग करते हैं। वेवब्राउजर की सहायता से हर कोई एप्लीकेशन डाउनलोड की जा सकती है और हर कोई काम वेब ब्राउज़र के माध्यम से किया जाता है।

ऑनलाइन होने वाले काम में से 95% काम वेब ब्राउज़र के माध्यम से ही होते हैं चाहे वह कोई भी वेब ब्राउज़र हो। इंटरनेट में सबसे अधिक मात्रा में उपयोग किए जाने वाला वेब ब्राउज़र एक प्रकार का सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन है। इसका उपयोग हम अपने लैपटॉप, टैबलेट,मोबाइल,कंप्यूटर इत्यादि सकते हैं।आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से वेब ब्राउज़र क्या है और वेब ब्राउज़र कैसे काम करते हैं। इसके कार्य प्रणाली क्या है इसके बारे में विस्तार से बात करेंगे।

वेब ब्राउज़र (Web Browser) क्या है?

वेब ब्राउज़र (Web Browser)एक ऐसा सॉफ्टवेयर जिसका निर्माण इंटरनेट पर उपस्थित कई चीजों को खोजने और देखने के लिए किया गया है। वेब ब्राउज़र एक प्रकार की सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी है। जिसे इंटरनेट पर उपस्थित सभी प्रकार की जानकारी खोजने देखने और पाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जैसे कंटेंट, इमेज, गेम, ऑडियो, वीडियो इत्यादि।

सरल भाषा में बात की जाए तो यह एक प्रकार का सर्च इंजन की है। इस सर्च इंजन की सहायता से सिर्फ देश की ही नहीं पूरे विश्व की जानकारी प्राप्त की जाती है।वेब ब्राउज़र  की सहायता से किसी भी चीज को खोलने के लिए उस पेज के एड्रेस यानी कि URL लिंक को वेब ब्राउज़र के सर्च बार में डालनी होती है। जैसे यदि आप गूगल को खोजना चाहते हैं। तो आपको वेब ब्राउज़र के साथ बाहर में google.com लिख कर सर्च करना होगा।

वेब ब्राउज़र (Web Browser) का इतिहास

वेब ब्राउज़र का सबसे पहले निर्माण सन 1991 में टीम बर्नर ली द्वारा किया गया। टीम बर्नर ली ने वेब ब्राउज़र का निर्माण करने के लिए एक डेवलपमेंट संस्था बनाई। जिसका नाम वर्ल्ड वाइड वेब कांस्टीट्यूम रखा था।  इस संस्था के डायरेक्टर टीम बर्नर ली खुद थे। उसके पश्चात टीम बर्नर ली द्वारा बनाए गए वेब ब्राउज़र का नाम भी world-wide-web रखा गया। आपने ज्यादातर वेबसाइट के आगे WWW देखा होगा इसका मतलब वर्ल्ड वाइड वेब ही है।

इसका नाम वेब ब्राउज़र इसलिए पड़ा है क्योंकि वेब का मतलब “इंटरनेट” होता है और ब्राउज़र का मतलब “ढूंढना” होता है इन दोनों को मिलाकर इसका नाम वेब ब्राउज़र पड़ा है। वेब ब्राउज़र के द्वारा इंटरनेट पर उपस्थित रिजल्ट खोजे जाते हैं और कई प्रकार के परिणाम खोजने में वेब ब्राउज़र बेहतरीन सहायता करता है। वेब ब्राउज़र की सहायता से ही एकदम परफेक्ट रिजल्ट खोजने में कोई दिक्कत नहीं होती है। वह ब्राउज़र सही रिजल्ट दिखाता है।

वेब ब्राउज़र (Web Browser) कैसे काम करता है?

  1. इस वेब ब्राउज़र टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल 99 प्रतिशत लोग करते हैं। वह ब्राउज़र का उद्योग इंटरनेट पर उपस्थित डाटा को खोजने तथा अपने कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर लाने के लिए किया जाता है। यह ब्राउज़र किसी प्रकार के डाटा को सर्च करने पर परफेक्ट रिजल्ट आपके सामने दर्शाता है।
  2. वेब ब्राउजर अपनी कंप्यूटर भाषा मतलब HTML के तौर पर काम करता है। HTML का पूरा नाम हाइपर टेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज है। जिसे वेब ब्राउज़र आसानी से समझ कर सही तरीके में डाटा उपलब्ध करवाता है। वेब ब्राउज़र HTML के तौर पर ही सही डाटा ढूंढने में सक्षम होता है।
  3. वेब ब्राउज़र में डाटा को ढूंढने के लिए या तो सीधा पेज यूआरएल लिंक डाल सकते हैं। या कोई कीवर्ड सर्च करके भी आप बेहतरीन डाटा ढूंढ सकते हैं। वेब ब्राउज़र का इस्तेमाल कई प्रकार के काम जो ऑनलाइन तरीके से किए जा रहे हैं। उनमें भी किया जाता है। वेब ब्राउज़र से कई प्रकार के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट भी संपन्न होते हैं।
  4. इंटरनेट में उपलब्ध डाटा को खोजने के लिए अलग अलग पद्धतियों और नियमों को फॉलो करना होता है। इन सभी नियमों को प्रोटोकॉल भी कह सकते हैं। आपने किसी भी वेबसाइट की आगे HTTP या HTTPS लगा हुआ देखा होगा। इसका मतलब यह है कि इंटरनेट पर उपस्थित उस पेज के वेब सर्वर को वेब ब्राउजर से कनेक्ट किया जाता है। और उसके पश्चात आपके वेब सर्वर पर उपस्थित फाइल वेब ब्राउज़र की सहायता से सर्च करने वाले लोगों को दिखाई जाएगी।
  5. किसी भी वेबपेज को इंटरनेट के माध्यम से देखने के लिए उस वेब पेज का URL डालना होता है। URL से पहले HTTP या HTTPS का भी इस्तेमाल करना अवश्य होता है। क्योंकि इन प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करने से प्राइज और सरवर के बीच आसानी से फाइल ट्रांसफर होती है। इस विधि को फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल भी कहते हैं। फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल के तौर पर HTTP और HTTPS का इस्तेमाल किया जाता है।
  6. इंटरनेट पर उपस्थित डाटा को अपने मोबाइल में देखने के लिए वेब ब्राउज़र द्वारा इंटरनेट के माध्यम से उस डाटा को खोजा जाता है और उस डाटा कि इंटरनेट पर लोकेशन भी बतानी पड़ती है। जिसे URL कहते हैं। यूआरएल किसी भी डाटा की एक प्रकार की लोकेशन या एड्रेस है। जिसके माध्यम से उस डाटा को वेब ब्राउज़र की सहायता से खोजा जा सकता है।
  7. यूआरएल का मतलब यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर है। यूआरएल का निर्माण वेब ब्राउज़र के पश्चात किया गया। क्योंकि वेब ब्राउज़र बनने के पश्चात पेज को खोजने दिक्कत होने लगी। उत्पन्न हुई दिक्कत को देखते हुए यूआरएल का निर्माण किया गया। यूआरएल के निर्माण के बाद ही हम किसी भी वेबसाइट को सर्च इंजन के माध्यम से खोलने में सक्षम हो पाए हैं। आज इसी पद्धति का उपयोग कर रहे हैं।
  8. URL में प्रोटोकॉल के तौर पर HTTP और HTTPS लगा हुआ होता है। सर्वर के तौर डोमेन नेम भी यूआरएल के साथ जुड़ा हुआ होता है। इसके अलावा जिसकी आर्टिकल,वीडियो या डाटा की यूआरएल है। उसका मेन key word भी इस यूआरएल में डाला हुआ होता है। इसकी बर्ड के आधार पर ही  डाटा का बेहतरीन रिजल्ट वेब ब्राउजर द्वारा दिखाया जाता है और उस डाटा को आसानी से कनेक्ट किया जा सके।

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Varun

मेरा नाम वरुण है और पेशे से में एक टेक्निकल ब्लॉगर हूँ. मुझे लोगों के बीच टेक्नोलॉजी और एंड्राइड से जुडी पोस्ट शेयर करना पसंद है. मुझे नई-नई टेक्नोलॉजी के बारे में जानना पसंद है और उस जानकारी को लोगों के साथ शेयर करना अच्छा लगता है. इसके अलावा एंड्राइड से जुडी हर तरह की जानकारी आप मेरे ब्लॉग पर पा सकते है.

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